गांव बनाम शहर: गैस बुकिंग में क्यों बना 20 दिन का फर्क?
45 दिन का इंतजार या 25 दिन में राहत—आखिर किसके साथ हो रहा है भेदभाव?
कालाअंब (सिरमौर)। औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में रसोई गैस सिलेंडर की बुकिंग अवधि को लेकर अब उपभोक्ताओं का आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग नियमों ने लोगों के बीच असंतोष पैदा कर दिया है, जिसे अब भेदभावपूर्ण नीति बताया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
क्षेत्र के उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले हर महीने एक गैस सिलेंडर आसानी से मिल जाता था, जिससे घरेलू व्यवस्था सुचारू रूप से चलती थी। लेकिन अब ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन की बुकिंग अवधि लागू होने से स्थिति मुश्किल हो गई है।
उपभोक्ताओं का आरोप है कि जहां शहरों में 25 दिन के भीतर दोबारा बुकिंग की सुविधा मिल रही है, वहीं गांवों के लिए 45 दिन का लंबा इंतजार तय कर दिया गया है।
उपभोक्ताओं का फूटा गुस्सा
स्थानीय उपभोक्ताओं में मीनाक्षी, ऋतु शर्मा, गौरव, सुरेश कुमार, गगन, संतोष, प्रिया, रमेश यादव, कमलेश, देशराज, बिट्टू, दर्शन लाल, विनय कुमार, शैलेन्द्र कुमार और सुरेन्द्र ने बताया कि गैस बुकिंग के लिए ग्रामीणों के लिए बनाया गया नियम उनके लिए भारी परेशानी खड़ी कर रहा है। उन्होंने मांग उठाई है कि बुकिंग अवधि को घटाकर 30 दिन किया जाए, ताकि उन्हें पहले की तरह हर महीने गैस सिलेंडर मिल सके।
गांवों के लिए क्यों अलग नियम?
ग्रामीणों का तर्क है कि गांवों में पहले से ही संसाधनों की कमी है और वैकल्पिक ईंधन के साधन सीमित हैं। ऐसे में सख्त नियम केवल ग्रामीण क्षेत्रों पर लागू करना अन्यायपूर्ण है।
उन्होंने इस व्यवस्था को सरासर पक्षपात बताते हुए सरकार से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए समान नियम लागू करने की मांग की है।
गैस एजेंसियों का क्या कहना है?
इस मामले में गैस एजेंसियों का कहना है कि वे केवल सरकार और एलपीजी कंपनियों के निर्देशों का पालन कर रही हैं। एजेंसियों के अनुसार जो मानक तय किए गए हैं उसी के अनुसार गैस बुकिंग और वितरण किया जा रहा है। यदि संबंधित कंपनियों द्वारा 45 दिन की अवधि को घटाकर 30 दिन किया जाता है, तो वे तुरंत नए नियम लागू करेंगी।
