चंबा में वेतन का संकट: 12 महीने से बिना सैलरी काम कर रहे वर्कर, अब बोले—भूखे मरने की नौबत
चंबा। काम करना तो करो वरना बजट वापस कर देंगे… — वन विभाग के नर्सरी वर्करों का वन विभाग अधिकारियों पर यह आरोप अब बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। एक साल से वेतन न मिलने से परेशान कर्मचारियों का गुस्सा सोमवार को सड़कों पर फूट पड़ा, जब उन्होंने उपायुक्त कार्यालय के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया।
भाजपा कार्यसमिति सदस्य जय सिंह की अगुवाई में हुए इस प्रदर्शन में वर्करों ने साफ कहा—अब हालात ऐसे हो चुके हैं कि परिवार का गुजारा करना मुश्किल हो गया है।
12 महीने से बिना वेतन, फिर भी काम जारी
वन मंडल चंबा के तहत मसरूंड, कंदला, मोहड़ी, माणी और गूं घराट क्षेत्रों में तैनात नर्सरी वर्कर लगातार रोपण, पौध उत्पादन और देखभाल जैसे जरूरी काम कर रहे हैं।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि 9 कर्मचारियों को पूरे 12 महीने से वेतन नहीं मिला। कर्मचारियों का कहना है कि पहले भी कई बार 6-6 महीने तक वेतन रोका गया, लेकिन इस बार स्थिति और गंभीर हो गई है।
काम करो, नहीं तो बजट वापस—अधिकारियों पर धमकी के आरोप
प्रदर्शन कर रहे वर्करों ने अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्हें बार-बार धमकाया जाता है—
👉 “काम करना है तो करो, नहीं तो वेतन का बजट वापस कर देंगे”
इतना ही नहीं, कर्मचारियों से 12-12 महीनों तक बिलों पर हस्ताक्षर करवा लिए जाते हैं, लेकिन भुगतान नहीं किया जाता।
चहेतों को पैसा, हमें इंतजार—भेदभाव का आरोप
वर्करों ने विभाग पर पक्षपात का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि
👉 कुछ “चहेते” कर्मचारियों को वेतन जारी कर दिया गया,
👉 जबकि उसी बीट के बाकी कर्मचारियों को एक साल से भुगतान नहीं मिला।
इससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी और असंतोष है।
2 दिन का अल्टीमेटम, फिर भूख हड़ताल
नर्सरी वर्करों ने जिला प्रशासन और वन विभाग के उच्च अधिकारियों को साफ चेतावनी दी है—
👉 अगर 2 दिनों के भीतर वेतन जारी नहीं हुआ, तो वे भूख हड़ताल शुरू करेंगे।
एक बड़ा सवाल
एक तरफ सरकार रोजगार और विकास की बात करती है, वहीं दूसरी ओर एक साल तक बिना वेतन काम करने को मजबूर कर्मचारी सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
👉 क्या इन वर्करों को उनका हक समय पर मिलेगा, या फिर उन्हें अपनी लड़ाई और तेज करनी पड़ेगी? इसका जवाब आने वाला समय देगा।
