नेता प्रतिपक्ष ने सुक्खू सरकार के चौथे बजट को बताया निराशाजनक, कर्मचारियों और आम जनता की हालत पर उठाए सवाल
शिमला। हिमाचल प्रदेश के ताजा बजट को लेकर सियासत तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के चौथे बजट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “दिशाहीन और निराशाजनक” करार दिया है। उनका कहना है कि इस बजट में न विजन दिखता है और न ही आम जनता के लिए कोई ठोस राहत।
जयराम ठाकुर ने दावा किया कि उनके लंबे राजनीतिक अनुभव में उन्होंने कई बजट देखे हैं, लेकिन यह बजट सबसे कमजोर और निराशाजनक प्रतीत होता है। उनके मुताबिक, बजट से न सिर्फ जनता बल्कि सत्तारूढ़ दल के नेता भी उत्साहित नजर नहीं आए।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विकास को गति देने के बजाय प्रदेश को पीछे धकेल रही है। “व्यवस्था परिवर्तन” के नाम पर जनता से सुविधाएं छीनने का काम किया जा रहा है। ठाकुर ने कहा कि पूर्व सरकार के समय शुरू किए गए हजारों संस्थानों को बंद करना और योजनाओं में कटौती करना इसी का उदाहरण है।
मुख्यमंत्री के रवैये पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि बजट भाषण के दौरान सरकार का दृष्टिकोण जमीनी हकीकत से दूर दिखा। ठाकुर के अनुसार, इस बजट में जिन विकास कार्यों का जिक्र किया गया है, उनमें से अधिकांश केंद्र सरकार की योजनाओं पर आधारित हैं।
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प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर भी नेता प्रतिपक्ष ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को समय पर वेतन न मिलना और वित्तीय दबाव बढ़ना सरकार की नीतियों की विफलता को दर्शाता है। उनके अनुसार, सरकारी फैसलों से कर्मचारी वर्ग में असंतोष बढ़ा है।
जयराम ठाकुर ने चुनावी वादों को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि मुफ्त बिजली और महिलाओं को आर्थिक सहायता जैसे बड़े वादों को अब शर्तों में उलझा दिया गया है, जिससे आम लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार केंद्र की योजनाओं को नए नाम देकर पेश कर रही है, जिससे जनता को भ्रमित किया जा रहा है। बढ़ते बिजली-पानी के बिल और किसानों-पशुपालकों से जुड़े मुद्दों को भी उन्होंने सरकार की नाकामी से जोड़ा।
अंत में ठाकुर ने कहा कि यह बजट कागजों में भले बड़ा दिखे, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर कमजोर है। उनके मुताबिक, प्रदेश का कोई भी वर्ग इससे संतुष्ट नजर नहीं आ रहा, जो सरकार के लिए गंभीर संकेत है।
