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HP Budget 2026: आर्थिक संकट से निपटने के लिए सुक्खू सरकार का बड़ा कदम—नेताओं और अफसरों की सैलरी में कटौती, ग्रुप C-D कर्मचारियों को राहत
शिमला। जब कोई सरकार आर्थिक संकट से जूझती है, तो अक्सर बोझ आम लोगों तक पहुंच जाता है। लेकिन हिमाचल प्रदेश में इस बार तस्वीर कुछ अलग दिखी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने बजट में ऐसा फैसला लिया, जिसने “सत्ता नहीं, जिम्मेदारी” का संदेश देने की कोशिश की है।
✦ सबसे पहले खुद पर वार
आर्थिक तंगी से जूझ रहे प्रदेश में मुख्यमंत्री ने अपने वेतन में 50% कटौती का ऐलान किया। यह सिर्फ एक वित्तीय कदम नहीं, बल्कि एक प्रतीकात्मक संदेश भी है कि मुश्किल वक्त में नेतृत्व सबसे आगे खड़ा होता है, न कि पीछे छिपता है।
✦ सत्ता के गलियारों में भी सख्ती
इस फैसले की गूंज सिर्फ मुख्यमंत्री तक सीमित नहीं रही।
मंत्रियों और उपमुख्यमंत्री के वेतन में 30% कटौती
विधायकों के वेतन में 20% कटौती
बोर्ड-निगमों के चेयरमैन और सलाहकारों के वेतन में भी 20% कटौती
सरकार का तर्क साफ है—जब जनता मुश्किल में है, तो सत्ता में बैठे लोगों को भी बराबरी से जिम्मेदारी निभानी होगी।
✦ अफसरशाही भी अछूती नहीं
प्रदेश के शीर्ष अफसर—IAS, IPS और IFS—भी इस वित्तीय अनुशासन से बाहर नहीं रखे गए।
बड़े अधिकारियों की सैलरी में 30% कटौती (6 महीने के लिए)
ग्रुप A और B के अन्य अधिकारियों के वेतन से भी आंशिक कटौती
यह कदम दिखाता है कि सरकार सिर्फ राजनीतिक वर्ग ही नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे को इस साझा जिम्मेदारी में शामिल करना चाहती है।
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✦ आम कर्मचारी को राहत
इस पूरे फैसले का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि ग्रुप C और D कर्मचारियों को पूरी तरह इस कटौती से बाहर रखा गया है।
यानी जो कर्मचारी पहले से सीमित आय में परिवार चलाते हैं, उनके वेतन को सुरक्षित रखा गया है।
यह फैसला इस बात का संकेत देता है कि सरकार ने आर्थिक सुधार के साथ-साथ सामाजिक न्याय और संवेदनशीलता को भी प्राथमिकता दी है।
✦ अस्थायी फैसला, भरोसे का वादा
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि यह कटौती स्थायी नहीं है। जैसे ही प्रदेश की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, इस निर्णय की समीक्षा कर कटा हुआ वेतन लौटाने पर विचार किया जाएगा।
✦ न्यायपालिका से भी सहयोग की अपील
सरकार ने इस आर्थिक पुनर्निर्माण में न्यायपालिका से भी सहयोग मांगा है, ताकि सभी संवैधानिक संस्थाएं मिलकर प्रदेश को संकट से बाहर निकाल सकें।
