834 सवालों के साथ गरमाएगा सदन, विपक्ष कानून-व्यवस्था और अधूरे वादों पर सरकार को घेरेगा
शिमला। हिमाचल प्रदेश में आम लोगों की उम्मीदों और चुनौतियों के बीच आज से विधानसभा बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू हो रहा है। यह सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि उन सवालों का मंच है जो सीधे जनता की जिंदगी से जुड़े हैं—महंगाई, रोजगार, सड़क, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे आज फिर सदन में गूंजेंगे।
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया के मुताबिक, इस चरण के लिए कुल 834 प्रश्न प्राप्त हुए हैं, जो यह दर्शाते हैं कि प्रदेश के मुद्दे कितने व्यापक और गंभीर हैं। सत्र सुबह 11 बजे शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा और इसमें 13 बैठकें प्रस्तावित हैं।
18 से 20 मार्च तक राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा होगी, जिसमें सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं पर बहस होगी। इसके बाद 21 मार्च को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगे—एक ऐसा दस्तावेज़, जिससे प्रदेश के हर वर्ग को उम्मीदें हैं।
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बजट पेश होने के बाद 23 से 25 मार्च तक उस पर चर्चा होगी, जबकि 27, 28 और 30 मार्च को मांगों पर मतदान होगा। 31 मार्च को गैर-सरकारी सदस्य दिवस और 1-2 अप्रैल को विधायी कार्य निपटाए जाएंगे।
जनता के मुद्दों पर सियासी घमासान तय
सत्र के शुरू होते ही राजनीतिक माहौल भी गरमाने वाला है। भारतीय जनता पार्टी ने पहले ही साफ कर दिया है कि वह सरकार को चुनावी वादों और बजट घोषणाओं के अधूरे रहने पर घेरने वाली है। नेता विपक्ष जय राम ठाकुर की अगुवाई में हुई बैठक में कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक फैसलों और जनहित के मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाने की रणनीति बनाई गई है।
जनता की आवाज बनता सत्र
यह सत्र केवल आंकड़ों और भाषणों तक सीमित नहीं है—यह उन लोगों की आवाज है जो बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, सुरक्षित सड़कों, रोजगार के अवसर और पारदर्शी शासन की उम्मीद करते हैं। लोकतंत्र की असली ताकत तभी दिखती है जब सत्ता और विपक्ष दोनों मिलकर जनता के अधिकारों और जरूरतों को प्राथमिकता दें।
अब देखना यह होगा कि इस बजट सत्र में उठने वाले सवालों का जवाब सिर्फ कागजों तक सीमित रहता है या फिर जमीनी स्तर पर लोगों की जिंदगी में भी बदलाव लाता है।
