चंबा में सरेला नाला में फिर थमी रफ्तार, 3 घंटे जाम—दलदली सड़क ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें
चंबा। हिमाचल के दूरदराज इलाकों में सड़क सिर्फ सफर का जरिया नहीं, बल्कि जीवन की रेखा होती है। लेकिन जब यही रास्ते खतरे में बदल जाएं, तो मुश्किलें कई गुना बढ़ जाती हैं। मंगलवार को चंबा-तीसा मुख्य मार्ग पर सरेला नाला के पास कुछ ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला, जहां करीब तीन घंटे तक वाहनों के पहिये थमे रहे और लोग सड़क पर ही जूझते नजर आए।
सुबह करीब 9 बजे बारिश के बाद कच्ची मिट्टी सड़क पर आ गिरने से रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध हो गया। देखते ही देखते दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। स्थानीय लोग, स्कूली बच्चे, मरीज और रोजमर्रा के काम से निकलने वाले लोग घंटों तक फंसे रहे—बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के।
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सूचना मिलने के बाद लोक निर्माण विभाग की टीम मशीनरी और मजदूरों के साथ मौके पर पहुंची। कड़ी मशक्कत के बाद करीब 12 बजे सड़क को बहाल किया जा सका, तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली।
हर बारिश के साथ बढ़ता खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि सरेला नाला अब एक ‘खतरे का जोन’ बन चुका है। यहां बार-बार भूस्खलन और दलदली जमीन के कारण सड़क पर सफर करना जोखिम भरा हो गया है। हालत यह है कि बस चालकों को भी यात्रियों की सुरक्षा के लिए उन्हें पहले उतारना पड़ता है और फिर खाली बस को किसी तरह इस हिस्से से पार कराना पड़ता है।
मानव जीवन पर सीधा असर
यह सिर्फ एक जाम की खबर नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन की हकीकत है। जब सड़कें बार-बार बंद होती हैं, तो इसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और रोजगार पर पड़ता है। अगर किसी मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाना हो, तो ऐसी स्थिति जानलेवा भी साबित हो सकती है।
पहले भी हो चुकी हैं घटनाएं
स्थानीय लोगों के मुताबिक, एक सप्ताह पहले भी इसी स्थान पर एक निजी बस कीचड़ में फंस गई थी, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया था। इससे साफ है कि समस्या नई नहीं है, बल्कि लगातार बनी हुई है।
प्रशासन का आश्वासन
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता जोगेंद्र शर्मा का कहना है कि मौसम साफ होने के बाद इस क्षेत्र में स्थायी समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, ताकि लोगों को बार-बार इस परेशानी का सामना न करना पड़े।
👉 जरूरत सिर्फ मरम्मत की नहीं, स्थायी समाधान की है।
चंबा-तीसा सड़क पर सरेला नाला जैसे संवेदनशील स्थानों पर मजबूत ड्रेनेज, पक्का निर्माण और नियमित निगरानी जरूरी है, ताकि लोगों का सफर सुरक्षित और आसान बन सके।
