मेरा गांव मेरा देश एक सहारा संस्था” की पहल से गरीब बच्चों को मिल रही निशुल्क शिक्षा, चेहरे पर दिखी मेहनत और सपनों की चमक
पांवटा साहिब (सिरमौर)। समाज में शिक्षा की अलख जगाने और जरूरतमंद बच्चों के भविष्य को संवारने की दिशा में “मेरा गांव मेरा देश एक सहारा संस्था” द्वारा संचालित “खुशियों का बैंक” एक प्रेरणादायक पहल बनकर उभरा है। इसी पहल के तहत निशुल्क ट्यूशन प्राप्त कर रहे बच्चों की वार्षिक परीक्षाएं सफलतापूर्वक संपन्न हो गईं।
परीक्षा समाप्त होते ही बच्चों के चेहरों पर आत्मविश्वास और खुशी साफ झलक रही थी। सालभर की मेहनत के बाद जब आखिरी पेपर खत्म हुआ, तो बच्चों ने एक-दूसरे के साथ अपनी खुशी साझा की। किसी ने मुस्कुराते हुए अपने सपनों की बात की, तो किसी ने दोस्तों के साथ तस्वीरें खिंचवाकर इस पल को यादगार बना लिया। यह नज़ारा केवल परीक्षा खत्म होने का नहीं, बल्कि उम्मीदों के एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक था।
संस्था द्वारा पूरे वर्ष इन बच्चों को निशुल्क ट्यूशन के माध्यम से पढ़ाई में सहयोग दिया जाता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले ये बच्चे, जो अक्सर संसाधनों की कमी के कारण पीछे रह जाते हैं, अब शिक्षा के जरिए अपने सपनों को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। संस्था न केवल पढ़ाई करवाती है, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास और आगे बढ़ने का हौसला भी भरती है।
परीक्षा के दौरान भी बच्चों को नियमित रूप से मार्गदर्शन दिया गया और उन्हें मेहनत व लगन के साथ पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया गया। बच्चों ने भी संस्था के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यहां मिलने वाली शिक्षा ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया है और अब वे अपने भविष्य को लेकर अधिक सकारात्मक महसूस करते हैं।
संस्था की अध्यक्ष पुष्पा खंडूजा और निदेशक डॉ. अनुराग गुप्ता ने बताया कि उनका उद्देश्य केवल पढ़ाना नहीं, बल्कि समाज के हर उस बच्चे तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाना है, जो किसी कारणवश इससे वंचित रह जाता है। उन्होंने कहा कि “खुशियों का बैंक” के माध्यम से बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना ही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है।
यह पहल न केवल शिक्षा का माध्यम बन रही है, बल्कि समाज में यह संदेश भी दे रही है कि अगर सामूहिक प्रयास हो, तो कोई भी बच्चा अपने सपनों से दूर नहीं रह जाए।
