Home योजनाएं हिमाचल में शहरी विकास को मिलेगी रफ्तार: केंद्र से 366 करोड़ मंजूर, बड़े प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी

हिमाचल में शहरी विकास को मिलेगी रफ्तार: केंद्र से 366 करोड़ मंजूर, बड़े प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी

by Dainik Janvarta
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हिमाचल में शहरी विकास को नई रफ्तार, केंद्र से 366 करोड़ मंजूर—विक्रमादित्य सिंह

शिमला। हिमाचल प्रदेश में शहरी ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम सामने आया है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार ने राज्य की कई अहम परियोजनाओं के लिए 366 करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी है। यह स्वीकृति विशेष सहायता योजना 2025-26 के तहत मिली है, जिससे शहरों में बुनियादी सुविधाओं का स्तर बेहतर होने की उम्मीद है।

सरकार का फोकस सिर्फ कागजी योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर बदलाव दिखाने पर है। इसी सोच के तहत शिमला की पुरानी सब्जी मंडी को आधुनिक स्वरूप देने की तैयारी है। करीब 140 करोड़ रुपये की इस परियोजना में मल्टीलेवल पार्किंग, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, फूड कोर्ट और अन्य आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे न सिर्फ कारोबार बढ़ेगा, बल्कि लोगों को भी एक ही जगह पर कई सुविधाएं मिल सकेंगी।

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इसी तरह हमीरपुर में पुराने एचआरटीसी बस स्टैंड की जगह अब एक आधुनिक सिटी सेंटर बनाने की योजना है। 80 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस प्रोजेक्ट में कन्वेंशन सेंटर, कमर्शियल स्पेस और मनोरंजन से जुड़ी सुविधाएं भी शामिल होंगी। धर्मशाला नगर निगम के लिए भी 20 करोड़ रुपये की नेबरहुड इम्प्रूवमेंट योजना को हरी झंडी मिल चुकी है।

मंत्री ने यह भी साफ किया कि राज्य सरकार ने कुल 600 करोड़ रुपये के प्रस्ताव केंद्र को भेजे थे, जिन पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। हाल ही में उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात कर प्रदेश के विकास से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

ग्रामीण इलाकों को भी इस विकास से जोड़ा जा रहा है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत करीब 1500 किलोमीटर सड़कों का निर्माण 2300 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा। टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और 15 अप्रैल से काम शुरू होने की तैयारी है।

हालांकि, मंत्री ने एक अहम चुनौती की ओर भी इशारा किया—भूमि उपलब्धता। उन्होंने लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि बजट की कमी नहीं है, लेकिन जमीन मिलना सबसे बड़ी अड़चन बन रहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा और लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई, यहां तक कि ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है।

कुल मिलाकर, ये परियोजनाएं सिर्फ निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि हिमाचल के शहरों और गांवों की तस्वीर बदलने की दिशा में एक ठोस पहल मानी जा रही हैं—जहां विकास का सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखेगा।

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