सोलन: नालागढ़ में फार्मा कंपनी पर 22 लाख का जुर्माना, ग्रामीणों ने कहा– जहरीली गैस और गंदे पानी से बढ़ रही परेशानी
सोलन। औद्योगिक क्षेत्र नालागढ़ के पलासड़ा में स्थित एक फार्मा कंपनी पर प्रदूषण फैलाने के आरोपों के बाद बड़ी कार्रवाई हुई है। हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कंपनी पर 22 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है और नोटिस जारी कर यह भी पूछा है कि वह भविष्य में प्रदूषण को किस तरह कम करेगी। मामले की जांच के लिए बोर्ड ने एक तकनीकी कमेटी भी गठित की है, जो लगातार निगरानी कर रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कंपनी की गतिविधियों से ध्वनि, जल और वायु प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। पलासड़ा पंचायत के उपप्रधान हरदीप बावा के अनुसार कंपनी ने प्लांट लगाने से पहले यह आश्वासन दिया था कि क्षेत्र में किसी भी तरह का प्रदूषण नहीं फैलने दिया जाएगा, लेकिन अब हालात इसके उलट दिखाई दे रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कुछ दिन पहले कंपनी का एक टैंकर दूषित पानी के साथ पकड़ा गया, जिसे खुले में फेंकने की तैयारी की जा रही थी। आरोप है कि कंपनी हर रोज लाखों लीटर पानी का इस्तेमाल कर रही है, लेकिन उसे सही तरीके से ट्रीट नहीं किया जा रहा। यह पानी नालों के जरिए चिकनी खड्ड में मिल रहा है। इसी पानी का उपयोग आसपास के किसान अपने खेतों की सिंचाई में करते हैं, जिससे जमीन के बंजर होने की आशंका बढ़ रही है।
ये भी पढ़ें
🔴 Kullu Road Accident: तीर्थन घाटी में धंसी सड़क, दिल्ली से घूमने आया परिवार कार समेत 50 फीट नीचे गिरा
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि रात के समय ध्वनि प्रदूषण और जहरीली गैस की समस्या बढ़ जाती है, जिससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत होती है और उन्हें अपने घरों के दरवाजे व खिड़कियां बंद रखनी पड़ती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी के आसपास के करीब एक दर्जन गांव इस प्रदूषण से प्रभावित हो रहे हैं।
मामले को लेकर क्षेत्र के लोग अब खुलकर सामने आने लगे हैं। ग्रामीणों ने तय किया है कि 23 मार्च को हिम परिवेश संस्था के नेतृत्व में वे एसडीएम से मुलाकात करेंगे और कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे।
उधर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव प्रवीण गुप्ता ने बताया कि कंपनी पर 22 लाख रुपये का पर्यावरण मुआवजा लगाया गया है। साथ ही कंपनी को निर्देश दिया गया है कि वह अल्पकालिक और दीर्घकालिक योजना बनाकर बताए कि प्रदूषण को कैसे कम किया जाएगा। बोर्ड की तकनीकी टीम मामले की लगातार जांच कर रही है।
(यह मामला अब पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन भी कर सकते हैं।)
