मोबाइल के लिए जिद बनी जानलेवा: सातवीं कक्षा के छात्र ने उठाया खौफनाक कदम, परिवार सदमे में
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। मोबाइल फोन को लेकर हुए मामूली विवाद के बाद 13 वर्षीय बच्चे ने ऐसा कदम उठा लिया, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इस घटना ने बच्चों में बढ़ती मोबाइल की लत और मानसिक दबाव को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार आरएच अस्पताल बिलासपुर से थाना सदर पुलिस को सूचना मिली कि एक नाबालिग बच्चे को अचेत अवस्था में जिला अस्पताल बिलासपुर लाया गया है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी।
पुलिस जांच में सामने आया कि मृतक की पहचान सचिन (13) पुत्र सतवीर सिंह निवासी गांव मल्लपुर सिद्धारी, डाकघर सयावली माला, तहसील बिलारी, जिला मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि सचिन अपनी मां से मोबाइल फोन देने की जिद कर रहा था, लेकिन इन दिनों उसकी परीक्षाएं चल रही थीं। इसी वजह से मां ने पढ़ाई का हवाला देते हुए मोबाइल देने से मना कर दिया।
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बताया जा रहा है कि मोबाइल न मिलने से सचिन नाराज हो गया और कुछ देर बाद अपने कमरे में चला गया। काफी देर तक जब वह बाहर नहीं आया तो परिजनों को चिंता हुई। जब परिवार के लोग कमरे में पहुंचे तो देखा कि सचिन ने अपनी मां की साड़ी को कमरे में लगे कुंडे से बांधकर फंदा लगा लिया था।
घबराए परिजन तुरंत उसे नीचे उतारकर उपचार के लिए जिला अस्पताल बिलासपुर ले गए, लेकिन वहां मौजूद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।
सूचना मिलने के बाद पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर परिजनों के बयान दर्ज किए और कानूनी प्रक्रिया पूरी की। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में मोबाइल फोन को लेकर हुए विवाद के बाद बच्चे द्वारा यह कदम उठाने की बात सामने आई है।
यह घटना एक बार फिर इस ओर इशारा करती है कि बच्चों के साथ संवाद, मानसिक स्थिति और डिजिटल उपकरणों के उपयोग को लेकर परिवारों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि बच्चों में मोबाइल की बढ़ती निर्भरता और भावनात्मक संवेदनशीलता को समझना आज के समय की बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
