West Asia Crisis: कच्चे माल की कमी से हिमाचल का फार्मा उद्योग संकट में, कीमतें 50% तक बढ़ीं
बद्दी (सोलन)। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और युद्ध का असर अब हिमाचल प्रदेश के फार्मा उद्योग पर भी साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे माल की कमी और बढ़ती कीमतों के कारण प्रदेश के दवा उद्योग गंभीर दबाव में आ गए हैं। उद्योग जगत का कहना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो दवाओं का उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है।
प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों खासकर बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (BBN) में बड़ी संख्या में फार्मा कंपनियां काम कर रही हैं। इन कंपनियों को दवा निर्माण के लिए जरूरी कई रसायन और कच्चा माल विदेशों से आयात करना पड़ता है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़े असर के कारण इन कच्चे पदार्थों की उपलब्धता प्रभावित हो गई है।
उद्योग प्रतिनिधियों के मुताबिक पिछले कुछ समय में कच्चे माल की कीमतों में करीब 40 से 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं सप्लाई में लगातार हो रही देरी के कारण कंपनियों के लिए उत्पादन को नियमित रूप से जारी रखना मुश्किल होता जा रहा है।
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फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज के राज्य अध्यक्ष चिरंजीव ठाकुर ने कहा कि मौजूदा हालात में उद्योगों पर दोहरी मार पड़ रही है। एक तरफ कच्चे माल के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं और दूसरी ओर समय पर सप्लाई नहीं मिलने से उत्पादन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस स्थिति का संज्ञान लेकर उद्योगों को राहत देने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की है।
वहीं उद्योगपति सुरेश गर्ग का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी ईरान-इजराइल तनाव का असर वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ा है। कई महत्वपूर्ण रसायनों और कच्चे माल की आपूर्ति बाधित होने से उद्योगों के सामने संचालन जारी रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
उद्योग संगठनों का कहना है कि यदि जल्द ही कच्चे माल की सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो आने वाले समय में दवा उत्पादन पर असर पड़ सकता है, जिसका प्रभाव बाजार में दवाओं की उपलब्धता और कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
