Himachal News: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, एसीएस को एसटीए और परिवहन निदेशक को आरटीए अध्यक्ष पद से हटाने के आदेश
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के परिवहन प्राधिकरणों से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) को राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) और परिवहन निदेशक को क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) के अध्यक्ष पद से हटाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि ये दोनों अधिकारी अब इन पदों पर काम नहीं कर सकेंगे।
न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने 29 मई 2023 को जारी उस सरकारी अधिसूचना को रद्द कर दिया, जिसके तहत इन नियुक्तियों को वैध माना गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि आदेश के बाद दोनों अधिकारी तत्काल प्रभाव से इन पदों पर कार्य नहीं करेंगे।
सरकार को 31 मार्च तक नया गठन करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिए हैं कि 31 मार्च तक राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) और क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) का कानून के अनुरूप पुनर्गठन किया जाए। अदालत ने कहा कि इन पदों पर ऐसे योग्य और निष्पक्ष व्यक्तियों की नियुक्ति होनी चाहिए, जिनका किसी परिवहन उपक्रम से प्रत्यक्ष हित न जुड़ा हो।
नई नियुक्तियां होने तक प्राधिकरण के अन्य सदस्य केवल रोजमर्रा के जरूरी काम निपटा सकेंगे। हालांकि इस दौरान वे रूट परमिट जारी करने या किसी तरह के नीतिगत फैसले नहीं ले पाएंगे।
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पहले लिए गए फैसले अमान्य नहीं होंगे
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक चेयरमैन के रूप में लिए गए निर्णय स्वतः अवैध नहीं माने जाएंगे, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित न हो। हालांकि यदि किसी फैसले को कानून के अन्य आधारों पर चुनौती दी जाती है तो उस पर अलग से विचार किया जा सकता है।
मोटर वाहन अधिनियम का हवाला
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि संबंधित अधिकारी हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में पदेन सदस्य हैं। मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 68(2) के अनुसार, किसी ऐसे व्यक्ति को एसटीए या आरटीए का सदस्य या अध्यक्ष नहीं बनाया जा सकता जिसका किसी परिवहन उपक्रम में वित्तीय हित हो।
अदालत के अनुसार एचआरटीसी के निदेशक मंडल से जुड़े होने के कारण इन अधिकारियों का वित्तीय और प्रशासनिक संबंध निगम से जुड़ जाता है, जिससे उनके लिए इन प्राधिकरणों का नेतृत्व करना निष्पक्षता के सिद्धांत के खिलाफ माना गया।
याचिका के बाद आया फैसला
यह मामला याचिकाकर्ता आनंद मोदगिल द्वारा दायर याचिका के बाद सामने आया था। याचिका में 29 मई 2023 की उस सरकारी अधिसूचना को चुनौती दी गई थी, जिसमें परिवहन सचिव को एसटीए और परिवहन निदेशक को प्रदेश के सभी आरटीए का अध्यक्ष बनाया गया था।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि परिवहन प्राधिकरणों को पूरी तरह निष्पक्ष होना चाहिए। यदि वही अधिकारी, जो सरकारी परिवहन उपक्रम से जुड़े हैं, निजी ऑपरेटरों को रूट परमिट देने या उनके खिलाफ कार्रवाई करने वाले प्राधिकरणों का नेतृत्व करेंगे तो पक्षपात की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। यह स्थिति निजी ऑपरेटरों के अधिकारों को भी प्रभावित कर सकती है।
