कैबिनेट में अटकी न्यायिक नियुक्तियां और सुविधाएं, हाईकोर्ट सख्त; अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) तलब
शिमला। प्रदेश में न्यायिक बुनियादी ढांचे और न्यायिक नियुक्तियों से जुड़े कई अहम मामलों में देरी पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस मामले में अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार की ओर से दायर हलफनामे की समीक्षा की और उस पर असंतोष व्यक्त किया। अदालत का कहना है कि न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव अभी तक मंत्रिपरिषद के पास लंबित पड़े हैं, जिससे न्यायिक कार्यप्रणाली पर असर पड़ रहा है।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि रजिस्ट्रार जनरल को 3.54 करोड़ रुपये की राशि जारी कर दी गई है। हालांकि इसके बावजूद कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसले अब भी कैबिनेट स्तर पर अटके हुए हैं।
Also Read
🔴 LPG Crisis: हिमाचल में गैस को लेकर सरकार अलर्ट, डीसी करेंगे रोज समीक्षा
इन लंबित प्रस्तावों में लॉ क्लर्क-कम-रिसर्च असिस्टेंट (लॉ इंटर्न) के 20 पदों की मंजूरी, सिविल जजों के लिए 34 नए न्यायालयों की स्थापना और उनके सहायक कर्मचारियों की नियुक्ति शामिल है। इसके अलावा हमीरपुर, जोगिंदर नगर और नालागढ़ में अतिरिक्त जिला जज के तीन नए पदों को मंजूरी देने का मामला भी अभी तक तय नहीं हो पाया है।
इसी तरह जिला एवं सत्र न्यायाधीशों के लिए नियमित भर्ती के जरिए जजमेंट राइटर के एक पद को लेकर भी सरकार ने कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है।
अदालत ने जिला न्यायपालिका से जुड़े बुनियादी संसाधनों पर भी चिंता जताई। खंडपीठ ने कहा कि जिला न्यायपालिका के लिए 13 वाहनों की मंजूरी का मामला 19 अगस्त 2025 से लंबित पड़ा है, जो प्रशासनिक स्तर पर देरी को दर्शाता है।
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि दो महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद फाइलें केवल एक विभाग से दूसरे विभाग में भेजी जा रही हैं, जबकि इस तरह के मामलों में तेजी से निर्णय लिया जाना चाहिए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने अगली सुनवाई 31 मार्च को तय की है और तब तक सरकार से स्पष्ट स्थिति पेश करने को कहा है।
