हिमाचल में तीसरे मोर्चे की आहट: डॉ. रामलाल मार्कंडेय बोले- 12 जिलों में संगठन खड़ा कर बनेगा नया राजनीतिक विकल्प
हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव से करीब दो साल पहले ही नई हलचल शुरू हो गई है। प्रदेश में लंबे समय से चर्चा में चल रहे तीसरे मोर्चे को लेकर अब तस्वीर कुछ साफ होती नजर आ रही है। पूर्व मंत्री डॉ. रामलाल मार्कंडेय ने संकेत दिए हैं कि राज्य में एक नई राजनीतिक पार्टी के गठन की तैयारी शुरू कर दी गई है।
हमीरपुर पहुंचे डॉ. मार्कंडेय ने सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि प्रदेश के सभी 12 जिलों में संगठन खड़ा करने की दिशा में काम शुरू हो चुका है। इसके लिए अलग-अलग जिलों के प्रभावशाली नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं से लगातार संपर्क साधा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि संभावित तीसरे मोर्चे में कई पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक और विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े वरिष्ठ नेता शामिल हो सकते हैं। उनका दावा है कि प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से असंतुष्ट कई नेता और कार्यकर्ता एक मजबूत वैकल्पिक मंच की तलाश में हैं।
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मार्कंडेय के अनुसार, वे प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर लोगों की राय और जनभावनाओं को समझने की कोशिश कर रहे हैं। अब तक कुल्लू, मंडी, हमीरपुर और बिलासपुर जिलों में नेताओं और स्थानीय लोगों से मुलाकात की जा चुकी है, जबकि आने वाले दिनों में कांगड़ा और चंबा जिलों का दौरा भी प्रस्तावित है।
उन्होंने बताया कि तीसरे मोर्चे को मजबूत बनाने के लिए ब्लॉक और जिला स्तर पर संगठन खड़ा किया जाएगा, ताकि चुनाव से पहले लोगों के सामने एक नया और प्रभावी राजनीतिक विकल्प पेश किया जा सके। लोगों से मिले सुझावों और जनभावनाओं के आधार पर नई पार्टी का घोषणापत्र भी तैयार किया जाएगा।
डॉ. मार्कंडेय ने यह भी स्वीकार किया कि सोलन, सिरमौर और हमीरपुर जैसे कुछ जिलों में अभी सीमित लोगों से ही संपर्क हो पाया है, लेकिन आने वाले समय में यहां भी प्रभावशाली व्यक्तियों और सामाजिक संगठनों को साथ जोड़ने की कोशिश की जाएगी।
गौरतलब है कि हाल ही में कुल्लू में करीब 40 नेताओं की एक अहम बैठक हुई थी, जिसमें भाजपा और कांग्रेस से असंतुष्ट कई नेताओं ने भाग लिया। हालांकि यह बैठक गोपनीय रखी गई थी, लेकिन इसके बाद प्रदेश की राजनीति में तीसरे मोर्चे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह पहल संगठित रूप लेती है तो हिमाचल की पारंपरिक दो-दलीय राजनीति में एक नया विकल्प सामने आ सकता है, जिससे आने वाले चुनावों में राजनीतिक समीकरण भी बदल सकते हैं।
