आईपीएस बनी… फिर भी नहीं रुकी सिरमौर की बेटी, आईएएस के सपने के लिए दोबारा लड़ी और सुधार ली रैंक
नाहन (सिरमौर)। एक बड़ी सफलता मिलने के बाद कई लोग रुक जाते हैं, लेकिन इसके विपरीत सिरमौर की बेटी निधि चौधरी ने साबित कर दिया कि अगर सपना बड़ा हो तो मंजिल मिलने तक सफर जारी रहता है।
नाहन विकास खंड की ग्राम पंचायत त्रिलोकपुर की 26 वर्षीय निधि चौधरी ने एक बार फिर संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया 466वीं रैंक हासिल की है। खास बात यह है कि इससे पहले भी वह यूपीएससी में 691वीं रैंक हासिल कर आईपीएस के लिए चयनित हो चुकी हैं और इन दिनों हैदराबाद में प्रशिक्षण ले रही हैं।
लेकिन निधि का सपना यहीं खत्म नहीं हुआ। उनका लक्ष्य शुरू से ही आईएएस अधिकारी बनना था। इसी जुनून के चलते उन्होंने आईपीएस प्रशिक्षण से एक साल का ब्रेक लेकर दोबारा परीक्षा देने का साहसिक फैसला किया और इस बार अपनी रैंक में बड़ा सुधार कर दिखाया।
5वें प्रयास में मिली बड़ी सफलता
निधि की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने यह मुकाम यूपीएससी के पांचवें प्रयास में हासिल किया है। कई उतार-चढ़ाव के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत जारी रखी।
दिल्ली में अपने पिता के साथ रहकर उन्होंने ज्यादातर सेल्फ स्टडी के जरिए तैयारी की। उनका मानना है कि अनुशासन, सही रणनीति और निरंतर अभ्यास से किसी भी कठिन परीक्षा को पार किया जा सकता है।
परिवार ने दिया हर कदम पर साथ
निधि के पिता धनीराम वर्तमान में आईटीबीपी में सहायक कमांडेंट के पद पर दिल्ली में तैनात हैं, जबकि उनकी माता जसविंदर कौर गृहिणी हैं। परिवार ने हमेशा बेटी के सपनों को प्राथमिकता दी और हर मुश्किल में उसका हौसला बढ़ाया।
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पिता बताते हैं कि निधि ने बचपन में ही आईएएस बनने का सपना देख लिया था और उसी लक्ष्य को लेकर वह लगातार आगे बढ़ती रही। पढ़ाई में शुरू से ही तेज रही निधि ने बायोटेक्नोलॉजी में बीएससी ऑनर्स की डिग्री हासिल की है।
गांव से लेकर जिले तक खुशी की लहर
जैसे ही शुक्रवार को UPSC का परिणाम घोषित हुआ और निधि की बेहतर रैंक की खबर सामने आई, त्रिलोकपुर से लेकर पूरे सिरमौर जिले में खुशी का माहौल बन गया। लोगों ने इसे क्षेत्र के लिए गर्व का पल बताया।
निधि की कहानी यह बताती है कि सफलता का असली मतलब सिर्फ मंजिल तक पहुंचना नहीं, बल्कि अपने सपने के लिए लगातार आगे बढ़ते रहना है।
