त्रिलोकपुर में धार्मिक पर्यटन को मिला नया आयाम, शिवताल में नौकायन का ले रहे श्रद्धालु आनंद
कालाअंब (सिरमौर)। जिला सिरमौर के प्रसिद्ध शक्तिपीठ त्रिलोकपुर मंदिर में धार्मिक पर्यटन को नया आयाम मिलता नजर आ रहा है। मंदिर परिसर के समीप स्थित शिवताल में शुरू की गई नौकायन (बोटिंग) सुविधा श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
मां बाला सुंदरी के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु अब पूजा-अर्चना के साथ शिवताल में नौकायन का आनंद भी ले रहे हैं। इससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक यात्रा के साथ एक सुखद अनुभव भी जुड़ गया है।
जानकारी के अनुसार प्रतिदिन लगभग 30 से 40 श्रद्धालु और पर्यटक शिवताल में नौकायन का आनंद ले रहे हैं। वहीं रविवार, अष्टमी और चतुर्दशी जैसे विशेष दिनों में यह संख्या लगभग दोगुनी हो जाती है। मंदिर परिसर में पहुंचने वाले श्रद्धालु परिवार और बच्चों के साथ नौकायन का आनंद लेते नजर आ रहे हैं, जिससे यहां का माहौल और भी आकर्षक बन गया है।
मंदिर न्यास की ओर से नौकायन के लिए शुल्क भी निर्धारित किया गया है। इसके तहत प्रति व्यक्ति आधे घंटे के लिए 100 रुपये शुल्क तय किया गया है, जबकि चार सीटों की क्षमता वाली एक पूरी बोट 300 रुपये में बुक की जा सकती है। श्रद्धालुओं का कहना है कि धार्मिक स्थल पर इस तरह की सुविधा मिलने से यहां आने का अनुभव और भी यादगार बन रहा है।
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आगामी चैत्र नवरात्र मेले को देखते हुए यहां श्रद्धालुओं की संख्या में और अधिक बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। मंदिर न्यास भी मेले को लेकर तैयारियों में जुट गया है।
मंदिर न्यास के उपाध्यक्ष एवं एसडीएम नाहन राजीव संख्यान ने बताया कि नवरात्र मेले के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी की पूरी संभावना है। उन्होंने बताया कि इस बार श्री रेणुका जी मेले की तर्ज पर मेले की पहली संध्या, अष्टमी और चौदस के दिन शिवताल में महाआरती का आयोजन भी किया जाएगा।
इसके अलावा मेले के दौरान झूलों के लिए मंदिर न्यास की ओर से भूमि उपलब्ध कराई जाएगी, जिसके लिए स्थान चिन्हित कर लिया गया है। साथ ही नवनिर्मित भंडारा स्थल में श्रद्धालुओं के लिए भंडारे आयोजित करने की भी व्यवस्था की गई है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि शिवताल में शुरू हुई नौकायन सुविधा से त्रिलोकपुर में धार्मिक पर्यटन को नई पहचान मिल रही है। आने वाले समय में यदि इस तरह की सुविधाओं का और विस्तार किया गया तो यह स्थल न केवल श्रद्धालुओं बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक प्रमुख आकर्षण बन सकता है।
