शिलाई में 282 पेड़ों का अवैध कटान, वन विभाग की दबिश के बाद मचा हड़कंप; प्रभावशाली परिवार पर एफआईआर
शिलाई (सिरमौर)। जिला सिरमौर के शिलाई क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हुए अवैध पेड़ कटान के मामले ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। पेट्रोल पंप के समीप इलाके में सैकड़ों पेड़ काटे जाने की शिकायत के बाद वन विभाग ने जांच की तो मामला काफी बड़ा निकला।
वन विभाग की जांच में सामने आया है कि यहां कुल 282 पेड़ों को बिना अनुमति काट दिया गया, जिसके बाद विभाग ने एक प्रभावशाली परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ शिलाई थाना में मामला दर्ज करवा दिया है। बताया जा रहा है कि आरोपियों में स्थानीय राजनीति से जुड़े कुछ नाम भी शामिल हैं।
14 सदस्यीय टीम ने किया मौके का निरीक्षण
शुक्रवार को वन परिक्षेत्र अधिकारी विश्वामित्र शर्मा के नेतृत्व में वन विभाग की 14 सदस्यीय टीम ने मौके का निरीक्षण किया। टीम में वन अधिकारी, वन रक्षक और वन मित्र श्रेणी के कर्मचारी शामिल थे।
निरीक्षण के दौरान पूरे क्षेत्र का बारीकी से मुआयना किया गया और पेड़ों की गिनती के साथ कटान की स्थिति का आकलन किया गया।
वन परिक्षेत्र अधिकारी के अनुसार मौके पर कुल 307 पेड़ चिन्हित किए गए, जिनमें से 25 पेड़ काटने की अनुमति ली गई थी, जबकि 282 पेड़ों को बिना अनुमति काट दिया गया।
अनुमति से ज्यादा कटान को माना गंभीर उल्लंघन
वन विभाग ने इसे नियमों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ शिलाई पुलिस थाना में एफआईआर दर्ज करवाई है। सूत्रों के अनुसार कार्रवाई की जद में आए लोगों में एक ही परिवार के कई सदस्य शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें पूर्व जिला परिषद सदस्य और शिलाई नाया पंचायत का एक बीडीसी सदस्य भी शामिल बताया जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज
मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। बताया जा रहा है कि संबंधित परिवार क्षेत्र के एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से जुड़ा हुआ है और उसका संबंध क्षेत्र के विधायक तथा उद्योग मंत्री से जोड़ा जा रहा है।
ऐसे में अब यह सवाल भी उठने लगे हैं कि क्या राजनीतिक प्रभाव के कारण लंबे समय तक इस तरह की गतिविधियां नजरअंदाज होती रहीं।
भूमि विवाद और कब्जों के भी आरोप
स्थानीय लोगों के अनुसार शिलाई विश्रामगृह के नीचे स्थित क्षेत्र में खसरा नंबर 1875/1 की लगभग 2 बीघा 5 बिस्वा भूमि वर्षों पहले पुलिस चौकी निर्माण के लिए दान की गई थी।
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आरोप है कि बाद में राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव कर भूमि का नंबर 1875/7 कर दिया गया और जिस जगह पुलिस चौकी बननी थी, वहां संबंधित परिवार के लोगों ने निजी मकान खड़े कर दिए।
बताया जाता है कि इसी भूमि पर दशकों पहले दूरसंचार विभाग का टावर भी लगाया गया था, जिसका किराया पंचायत को मिलना था। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि टावर का किराया भी कथित तौर पर यही परिवार लेता रहा। लोगों का कहना है कि 1875/1 से 1875/7 तक धीरे-धीरे अवैध कब्जे बढ़ते हुए वर्तमान थाना क्षेत्र तक पहुंच गए हैं।
डीएफओ ने की अवैध कटान की पुष्टि
उधर डीएफओ रेणुका बलदेव राज ने 282 पेड़ों के अवैध कटान की पुष्टि करते हुए बताया कि इस मामले में संबंधित लोगों के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच जारी है और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी नजर
मामले के सामने आने के बाद अब क्षेत्र के लोगों की नजर प्रशासन और सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच होती है, तो शिलाई क्षेत्र में वर्षों से चले आ रहे कई अन्य जमीन और कब्जों से जुड़े मामले भी सामने आ सकते हैं।
