राज्यसभा टिकट पर सस्पेंस के बीच बोले आनंद शर्मा
शिमला। हिमाचल प्रदेश की राज्यसभा सीट को लेकर कांग्रेस में चल रही चर्चाओं के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा का बयान सुर्खियों में आ गया है। राज्यसभा के संभावित उम्मीदवार के तौर पर उनका नाम चर्चा में था, लेकिन नाम घोषित नहीं होने के बाद उन्होंने गुरुवार को शिमला में मीडिया से बात करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी।
आनंद शर्मा ने कहा कि आज की राजनीति में सच बोलना कई बार अपराध जैसा माना जाने लगा है और जो व्यक्ति अपने स्वाभिमान के साथ खड़ा रहता है, उसे उसकी कीमत भी चुकानी पड़ती है। उन्होंने साफ कहा कि वह सच बोलना नहीं छोड़ेंगे।
राजनीति में स्वाभिमान की कीमत चुकानी पड़ती है
मीडिया से बातचीत में आनंद शर्मा ने अपने लंबे राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि उनका राजनीति में लगभग पचास वर्षों का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने कई दौर देखे हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, डॉ. मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी के नेतृत्व में भी काम किया है।
उन्होंने कहा,
“मैं निराशा शब्द का इस्तेमाल नहीं करूंगा, लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि राजनीति में स्वाभिमान बहुत महंगा होता है और उसकी कीमत चुकानी पड़ती है।”
शर्मा ने यह भी कहा कि राज्यसभा उम्मीदवार के चयन को लेकर उन्हें कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। यह फैसला पार्टी नेतृत्व का होता है और उसी के बारे में अंतिम जानकारी भी वही दे सकते हैं।
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“हिमाचल से मेरा रिश्ता हमेशा रहेगा”
आनंद शर्मा ने कहा कि उन्होंने दशकों तक हिमाचल प्रदेश और देश का प्रतिनिधित्व किया है। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कांगड़ा और मंडी जैसे क्षेत्रों में कई संस्थानों की स्थापना में योगदान दिया, जिन्हें लोग याद रखेंगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शिमला उनका घर है और वह यहां आते-जाते रहेंगे। राज्यसभा टिकट को लेकर उन्होंने पार्टी हाईकमान पर कोई टिप्पणी करने से भी परहेज किया।
जी-23 विवाद से जोड़कर देखी जा रही टिप्पणी
राजनीतिक विश्लेषक आनंद शर्मा के इस बयान को उस समय से जोड़कर देख रहे हैं जब कांग्रेस के भीतर जी-23 समूह ने संगठन में बदलाव की मांग उठाई थी। उस समूह में आनंद शर्मा भी प्रमुख चेहरों में शामिल थे। इसलिए “सच बोलने की कीमत चुकाने” वाला उनका बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
सुक्खू की प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम पर जब मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि पार्टी में फैसले संगठन के स्तर पर होते हैं और कार्यकर्ता तथा नेता पार्टी के निर्देशों का पालन करते हैं।
उन्होंने कहा कि इसमें सच या झूठ का सवाल नहीं, बल्कि यह केवल एक राजनीतिक प्रक्रिया है और पार्टी का उम्मीदवार उसकी विचारधारा का प्रतिनिधित्व करेगा।
