यूजीसी नियमों के समर्थन में धर्मशाला में आरक्षित वर्गों की एकजुटता
2027 में राजनीतिक ताकत दिखाने का ऐलान
कांगड़ा। कांगड़ा जिले के धर्मशाला में शनिवार को ओबीसी, एससी और एसटी समुदायों ने यूजीसी के नए नियमों के समर्थन में जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया। दाड़ी मेला ग्राउंड से शुरू हुई यह रैली मुख्य बाजारों से गुजरते हुए उपायुक्त कार्यालय तक पहुंची, जहां प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की और ज्ञापन सौंपा।
यूजीसी नियमों को बताया अधिकारों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा
रैली में वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन केवल यूजीसी नियमों के समर्थन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संविधान प्रदत्त अधिकारों और सामाजिक न्याय की रक्षा का सवाल है। उनका कहना था कि उच्च शिक्षा और सरकारी सेवाओं में आरक्षण से जुड़े प्रावधानों को कमजोर करने की किसी भी कोशिश का वे विरोध करेंगे।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि आरक्षित वर्गों के अधिकारों को लेकर राजनीतिक दलों ने हमेशा गंभीरता नहीं दिखाई। उन्होंने विशेष रूप से पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार के पुराने रुख का उल्लेख करते हुए कहा कि मंडल कमीशन की सिफारिशों और 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के विरोध में दायर याचिकाओं का समर्थन किया गया था, जिससे समुदाय में असंतोष रहा है।
राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन, रखीं प्रमुख मांगें
रैली के समापन पर जिला प्रशासन के माध्यम से राज्यपाल को एक विस्तृत ज्ञापन भेजा गया। इसमें प्रमुख मांगें इस प्रकार रहीं—
93वें संविधान संशोधन को प्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
सरकारी विभागों में आरक्षित वर्गों के रिक्त पदों को विशेष अभियान चलाकर शीघ्र भरा जाए।
प्रदेश में ओबीसी जातिगत जनगणना शुरू की जाए, ताकि वास्तविक आंकड़ों के आधार पर नीतियां बन सकें।
ओबीसी प्रमाणपत्र की वैधता आजीवन की जाए, जिससे युवाओं को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
2027 विधानसभा चुनाव पर नजर
रैली के दौरान ओबीसी संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने संकेत दिया कि यदि मुख्य राजनीतिक दल आरक्षित वर्गों की मांगों को गंभीरता से नहीं लेते, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में तीसरा विकल्प सामने लाया जाएगा। उनका कहना था कि जब तक विधानसभा में समुदाय का अपना प्रतिनिधित्व मजबूत नहीं होगा, तब तक नीतिगत स्तर पर बदलाव संभव नहीं है।
काल्पनिक विरोध बंद हो
आरक्षित वर्ग के नेताओं ने यह भी कहा कि यूजीसी नियमों को लेकर सामान्य वर्ग द्वारा किया जा रहा विरोध “भ्रम पर आधारित” है। उनका दावा था कि इन नियमों में बदलाव की मांग उन्होंने कभी नहीं की और वे चाहते हैं कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप इन्हें लागू किया जाए, ताकि छात्र हित सुरक्षित रह सकें।
धर्मशाला की यह रैली कांगड़ा जिले में आरक्षित वर्गों की राजनीतिक और सामाजिक सक्रियता का बड़ा संकेत मानी जा रही है। आने वाले समय में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और अधिक गरमा सकता है।
