राजगढ़ में बैंक धोखाधड़ी, 6.90 करोड़ रूपए का लोन लेकर मशीनरी हटाने का आरोप, केस दर्ज
राजगढ़ (सिरमौर)। जिला सिरमौर के राजगढ़ क्षेत्र में बैंक धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस थाना राजगढ़ में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की स्ट्रेस्ड एसेट्स रिकवरी ब्रांच, शिमला की शिकायत पर केस दर्ज किया गया है। मामला करीब ₹6.90 करोड़ के लोन से जुड़ा है।
क्या है पूरा मामला?
बैंक की शिकायत के अनुसार, उषा कंवर पत्नी अनिल सचदेवा, निवासी सनौरा तहसील राजगढ़, जिला सिरमौर ने वर्ष 2023 में SBI की परवाणु शाखा से सनौरा में कोल्ड स्टोर निर्माण के लिए 6.90 करोड़ रूपए का लोन लिया था।
आरोप है कि लोन लेने के बाद उधारकर्ता ने नियमित रूप से किश्तों का भुगतान नहीं किया। भुगतान न होने पर बैंक ने खाते को NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) घोषित कर दिया और रिकवरी की प्रक्रिया शुरू कर दी।
Also Read
🔴 मंडी: जोगिंद्रनगर के लक्ष्मी बाजार होटल में व्यक्ति का शव बरामद, कमरे से उठ रहा था धुआं
नोटिस के बाद हटाई गई मशीनरी
बैंक का आरोप है कि रिकवरी नोटिस जारी होने के बाद उषा कंवर ने अपने पति अनिल सचदेवा के साथ मिलकर लोन राशि से खरीदी गई मशीनरी और अन्य उपकरणों को चुपचाप कोल्ड स्टोर परिसर से हटा दिया।
बताया जा रहा है कि यह मशीनरी और संपत्ति बैंक के पास गिरवी (मॉर्गेज/हाइपोथेकशन) रखी गई थी। ऐसे में बिना अनुमति उसे हटाना बैंक के साथ धोखाधड़ी और अमानत में खयानत की श्रेणी में आता है।
किन धाराओं में मामला दर्ज?
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(2) और 3(5) के तहत केस दर्ज कर लिया है। पुलिस द्वारा मामले की जांच (तफ्तीश) शुरू कर दी गई है और संबंधित दस्तावेजों व साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है।
बैंकिंग नियमों के तहत सख्त कार्रवाई संभव
बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार, यदि गिरवी रखी गई संपत्ति को जानबूझकर हटाया या नुकसान पहुंचाया जाता है तो यह गंभीर आपराधिक कृत्य माना जाता है। जांच में आरोप सिद्ध होने पर कानूनी कार्रवाई और संपत्ति कुर्की जैसी प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है।
पुलिस अधीक्षक सिरमौर एनएस नेगी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
(नोट: मामले की जांच जारी है। आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही होगी।)
