Himachal News: अब उद्योगों की जरूरत के अनुसार बदलेगा आईटीआई का पाठ्यक्रम
मंडी। हिमाचल प्रदेश में तकनीकी शिक्षा को रोजगार से सीधे जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। प्रदेश के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) अब नए और आधुनिक पाठ्यक्रम के साथ आगे बढ़ेंगे। विभाग ने तय समय से पहले ही सिलेबस में बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि प्रशिक्षुओं को उद्योगों की मौजूदा जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा सके।
आमतौर पर आईटीआई का पाठ्यक्रम हर पांच वर्ष में संशोधित किया जाता है, लेकिन इस बार तेजी से बदलती तकनीक और औद्योगिक मांग को देखते हुए चार वर्ष में ही बदलाव की पहल की गई है। विभाग का लक्ष्य है कि आगामी शैक्षणिक सत्र से ही नया सिलेबस लागू कर दिया जाए।
क्यों जरूरी हुआ बदलाव?
प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक इकाइयों ने तकनीकी शिक्षा विभाग को फीडबैक दिया था कि संस्थानों में अभी भी कई ट्रेड्स में पुरानी तकनीकों पर आधारित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जबकि उद्योगों में अब ऑटोमेशन, डिजिटल कंट्रोल सिस्टम, एडवांस मशीनिंग और कंप्यूटराइज्ड उपकरणों का व्यापक उपयोग हो रहा है।
इस असंतुलन का असर यह हो रहा है कि आईटीआई से पास आउट होने वाले प्रशिक्षुओं को उद्योगों में नियुक्ति से पहले अतिरिक्त प्रशिक्षण देना पड़ता है। इससे युवाओं की रोजगार क्षमता प्रभावित होती है और उद्योगों की उत्पादकता पर भी असर पड़ता है।
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स की भागीदारी
तकनीकी शिक्षा विभाग ने इस बार सिलेबस तैयार करने की प्रक्रिया में उद्योग विशेषज्ञों को भी शामिल किया है। उद्देश्य साफ है—किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक और आधुनिक तकनीक आधारित प्रशिक्षण सुनिश्चित करना। विभाग का मानना है कि जब तक पाठ्यक्रम सीधे उद्योग की वास्तविक जरूरतों से नहीं जुड़ेगा, तब तक कौशल विकास की अवधारणा अधूरी रहेगी।
अगले वित्त वर्ष से लागू होगा नया सिलेबस
विभाग की ओर से जानकारी दी गई है कि आगामी वित्त वर्ष में संशोधित पाठ्यक्रम लागू करने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत विभिन्न ट्रेड्स की समीक्षा, तकनीकी अपडेट और प्रशिक्षण पद्धति में सुधार शामिल होगा।
तकनीकी शिक्षा विभाग के निदेशक अक्षय सूद ने बताया कि पाठ्यक्रम में बदलाव को लेकर मंथन जारी है और नियमानुसार पूरी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। उद्योग जगत से जुड़े विशेषज्ञों के सुझावों को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि युवाओं को सीधे रोजगार के योग्य बनाया जा सके।
युवाओं को मिलेगा सीधा फायदा
नए सिलेबस के लागू होने से प्रदेश के हजारों युवाओं को फायदा होगा। उन्हें इंडस्ट्री में काम करने के लिए अतिरिक्त प्रशिक्षण की जरूरत नहीं पड़ेगी और रोजगार मिलने की संभावना बढ़ेगी। साथ ही, उद्योगों को भी प्रशिक्षित और दक्ष मानव संसाधन आसानी से उपलब्ध हो सकेगा।
तकनीकी शिक्षा के इस बदलाव को प्रदेश में कौशल विकास की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
