निजी कंपनी के उत्पादों के प्रमोशन में महिला प्रशासनिक अधिकारी घिरीं, सरकार ने मांगी रिपोर्ट
शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी में तैनात एक महिला प्रशासनिक अधिकारी निजी कंपनी के उत्पादों के प्रमोशन को लेकर विवादों में आ गई हैं। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो और फोटो के बाद मामला तूल पकड़ गया है और अब शिकायत सरकार तक पहुंच चुकी है।
जानकारी के अनुसार, अधिकारी ओशिन शर्मा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक निजी कंपनी के उत्पादों से जुड़े कई वीडियो और तस्वीरें साझा की हैं। इन पोस्ट्स में उत्पादों का प्रचार-प्रसार स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। पिछले एक सप्ताह से लगातार साझा किए जा रहे इन वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी हुई है।
सरकार ने लिया संज्ञान
मामला प्रदेश सरकार के शीर्ष स्तर तक पहुंच गया है। मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने पुष्टि की है कि उनके पास इस संबंध में शिकायत प्राप्त हुई है। उन्होंने संबंधित विभाग को पूरे मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
हालांकि, अभी तक विभागीय स्तर पर आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
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क्या कहते हैं नियम?
सरकारी कर्मचारियों पर लागू सिविल सर्विसेज कंडक्ट नियमों के अनुसार, कोई भी सरकारी कर्मचारी बिना अनुमति किसी व्यवसाय, व्यापार या निजी लाभ से जुड़ी गतिविधि में शामिल नहीं हो सकता। सिविल सर्विसेज कंडक्ट नियम 15 (1) स्पष्ट करता है कि सरकारी सेवक किसी व्यापार या रोजगार में संलग्न नहीं होगा, जब तक कि सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति न हो।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या संबंधित अधिकारी ने प्रमोशन के लिए विभागीय अनुमति ली थी या नहीं। फिलहाल इस पर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
सोशल मीडिया पर बढ़ी बहस
महिला अधिकारी के सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स हैं। वीडियो वायरल होने के बाद कई यूज़र्स ने सवाल उठाए हैं कि क्या उच्च प्रशासनिक पदों पर तैनात अधिकारियों को निजी कंपनियों के उत्पादों का प्रचार करना चाहिए? क्या इससे सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन होता है?
अधिकारी ने साधी चुप्पी
इस पूरे विवाद पर संबंधित महिला अधिकारी ने फिलहाल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। बताया जा रहा है कि मामले की जांच के बाद ही विभाग की ओर से आधिकारिक स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
अब देखना होगा कि जांच रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं। फिलहाल राजधानी की सियासत और प्रशासनिक गलियारों में यह मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
