हिमाचल: टीजीटी वेतनमान और पदोन्नति पर शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला, शास्त्री व भाषा अध्यापकों को फिलहाल राहत नहीं
शिमला। हिमाचल प्रदेश में शास्त्री (संस्कृत) और भाषा अध्यापक (हिंदी) शिक्षकों को टीजीटी के समान वेतनमान और प्रवक्ता पद पर पदोन्नति देने के मुद्दे पर शिक्षा विभाग ने स्पष्ट रुख अपना लिया है। विभाग ने कहा है कि जब तक उच्च न्यायालय में लंबित अपील पर अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक किसी भी याचिकाकर्ता को टीजीटी के बराबर वेतनमान या पदोन्नति का लाभ नहीं दिया जाएगा।
दरअसल, कई शिक्षकों ने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए मांग की थी कि उन्हें टीजीटी के समान वेतनमान और आगे प्रवक्ता पद पर पदोन्नति का अधिकार दिया जाए। इन याचिकाओं में समीर, हरीश कुमार, ममता देवी, घनश्याम और जितेंद्र कुमार सहित अन्य शिक्षकों ने राहत की गुहार लगाई थी। उच्च न्यायालय ने इन मामलों का निपटारा करते हुए संबंधित प्राधिकरण को कानून के अनुरूप निर्णय लेने के निर्देश दिए थे।
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अधिसूचना का हवाला
शिक्षा विभाग ने अपने आदेश में 20 अगस्त 2022 की अधिसूचना का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि बीएड और टीईटी उत्तीर्ण शास्त्री और भाषा अध्यापकों का केवल पदनाम बदला गया था। उन्हें टीजीटी (संस्कृत) और टीजीटी (हिंदी) का पदनाम दिया गया, लेकिन टीजीटी का वेतनमान स्वीकृत नहीं किया गया। विभाग का तर्क है कि केवल पदनाम परिवर्तन से वेतनमान या पदोन्नति का स्वतः अधिकार नहीं बनता।
हेमराज मामले पर लगी रोक
उच्च न्यायालय ने 4 सितंबर 2023 को हेमराज मामले में शास्त्री और भाषा अध्यापकों को टीजीटी के समान वेतनमान और प्रवक्ता पद पर पदोन्नति देने के आदेश दिए थे। हालांकि, राज्य सरकार ने इस निर्णय को एलपीए संख्या 86/2024 के तहत चुनौती दी है। 17 अक्तूबर 2025 को हाईकोर्ट ने उक्त फैसले के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी। विभाग का कहना है कि चूंकि इस फैसले पर स्थगन आदेश लागू है, इसलिए वर्तमान मामलों में भी लाभ नहीं दिया जा सकता।
डॉ. लेखराम शर्मा केस से अलग स्थिति
कुछ शिक्षकों ने डॉ. लेखराम शर्मा मामले का हवाला दिया, जिसमें शास्त्री शिक्षकों को प्रवक्ता पद पर पदोन्नति के लिए पात्र माना गया था। इस पर विभाग ने स्पष्ट किया कि उस मामले में संबंधित शिक्षक पहले से ही टीजीटी के समान वेतनमान पर कार्यरत थे और बाद में पदोन्नत हुए थे, जबकि वर्तमान याचिकाकर्ता अब भी शास्त्री के मूल वेतनमान पर कार्य कर रहे हैं।
अंतिम फैसला आने तक इंतजार
शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि सभी संबंधित दावों पर अंतिम निर्णय उच्च न्यायालय में लंबित एलपीए के फैसले के बाद ही लिया जाएगा। तब तक किसी भी प्रकार की वित्तीय या पदोन्नति संबंधी राहत संभव नहीं है।
