मंडी में दो अलग अलग मुद्दों पर प्रदर्शन के दौरान आपस में उलझे प्रदर्शनकारी, उपायुक्त कार्यालय के बाहर बनी तनाव की स्थिति
मंडी। मंडी शहर में बुधवार को दो अलग-अलग मुद्दों को लेकर प्रदर्शन हुए, जिनके चलते उपायुक्त कार्यालय परिसर के बाहर कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति बन गई। एक ओर जहां लोग बिजली के स्मार्ट मीटर लगाने के विरोध में जुटे थे, वहीं दूसरी ओर नीलम पेट्रोल कांड को लेकर न्याय की मांग उठाई जा रही थी।
दोनों समूह अपने-अपने मुद्दों को लेकर उपायुक्त कार्यालय पहुंचे थे। इसी दौरान नीलम पेट्रोल प्रकरण से जुड़े प्रदर्शनकारियों के साथ आए एक व्यक्ति की बहस स्मार्ट मीटर विरोध प्रदर्शन में शामिल महिलाओं से हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वह व्यक्ति महिलाओं से नीलम मामले में समर्थन देने की बात कह रहा था।
बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान जब उस व्यक्ति ने यह टिप्पणी की कि कुछ लोग पैसे के लिए प्रदर्शन में शामिल होते हैं, तो वहां मौजूद महिलाएं आक्रोशित हो गईं। उन्होंने इस आरोप का कड़ा विरोध किया और उसे खरी-खोटी सुनाई। महिलाओं का कहना था कि वे पिछले एक सप्ताह से स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर आंदोलन की तैयारी कर रही थीं और यह प्रदर्शन पूरी तरह से उनके अधिकारों से जुड़ा है।
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कुछ समय तक मौके पर माहौल गरमाया रहा, लेकिन बाद में स्थिति सामान्य हो गई। दोनों पक्षों ने अपने-अपने ज्ञापन संबंधित अधिकारियों को सौंपे।
गौरतलब है कि शहर में इन दिनों स्मार्ट मीटर और नीलम पेट्रोल प्रकरण को लेकर अलग-अलग स्तर पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं, जिनमें स्थानीय लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करें पहले, स्मार्ट मीटर के खिलाफ महिलाओं का प्रदर्शन तेज
मंडी के लडभड़ोल क्षेत्र में बिजली विभाग द्वारा स्मार्ट मीटर स्थापित करने की प्रक्रिया का ग्रामीणों, खासकर महिलाओं, ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। बुधवार को त्रैम्बली सहित आसपास के कई महिला मंडलों ने एकजुट होकर लडभड़ोल बाजार से विद्युत कार्यालय तक रोष रैली निकाली। रैली के दौरान महिलाओं ने सरकार और विभाग के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपने की बात कही।
प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि क्षेत्र में स्कूलों की स्थिति दयनीय है, अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं, सड़कों की हालत खराब है और पेयजल समस्या भी बरकरार है। ऐसे में सरकार को पहले इन बुनियादी व्यवस्थाओं को “स्मार्ट” बनाना चाहिए, उसके बाद ही स्मार्ट मीटर जैसे प्रोजेक्ट लागू करने चाहिए।
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इससे एक दिन पहले भी गांव में स्मार्ट मीटर लगाने पहुंचे बिजली विभाग के कर्मचारियों को महिलाओं ने विरोध जताते हुए वापस लौटा दिया था। महिलाओं का आरोप है कि जब वे अपनी बात रखने के लिए विद्युत कार्यालय पहुंचीं तो एक कर्मचारी ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और बिना अनुमति अंदर जाने से रोक दिया।
महिलाओं ने चेतावनी दी है कि जब तक क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं में सुधार नहीं होता, वे किसी भी परिस्थिति में स्मार्ट मीटर नहीं लगने देंगी। क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर माहौल गरमाया हुआ है और आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज हो सकता है।
