हिमाचल में अनोखी पहल: अब स्कूलों में खुद उगाएंगे मशरूम, मिड-डे मील में मिलेगा प्रोटीन से भरपूर भोजन
सोलन। हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में बच्चों के पोषण को मजबूत बनाने के लिए एक बेहद अनूठी पहल शुरू की जा रही है। अब विद्यार्थियों को मिड-डे मील में परोसी जाने वाली मशरूम बाहर से नहीं खरीदी जाएगी, बल्कि इसे स्कूल परिसर में ही तैयार किया जाएगा। इस विशेष योजना को मिशन व्हाइट अंब्रेला नाम दिया गया है और इसकी शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर सोलन जिले से की जा रही है।
स्कूल बनेंगे मशरूम लैब
योजना के तहत स्कूलों में न्यूट्रीशन गार्डन के भीतर ही मशरूम उत्पादन की व्यवस्था बनाई जाएगी। खास बात यह है कि इसमें शिक्षक और विद्यार्थी दोनों मिलकर मशरूम उगाने की प्रक्रिया सीखेंगे। इससे बच्चों को खेती, पोषण और वैज्ञानिक जानकारी एक साथ मिलेगी।
एमडीएम जिला नोडल अधिकारी राजकुमार पराशर के अनुसार, स्कूलों में तैयार ताजा मशरूम सीधे मिड-डे मील में शामिल की जाएगी, जिससे बच्चों को प्रोटीन से भरपूर भोजन मिलेगा।
शिक्षकों को दिया जाएगा विशेष प्रशिक्षण
इस पहल के पहले चरण में जिले के 24 क्लस्टर स्कूलों का चयन किया गया है।
24 फरवरी को चयनित स्कूलों के टीजीटी और प्रवक्ताओं को प्रशिक्षण मिलेगा
प्रशिक्षण मशरूम विशेषज्ञों द्वारा दिया जाएगा
प्रशिक्षित शिक्षक आगे अपने क्लस्टर के अन्य स्कूलों में बच्चों और शिक्षकों को ट्रेनिंग देंगे
इस दौरान खास तौर पर ढिंगरी मशरूम उगाने की तकनीक सिखाई जाएगी।
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क्यों खास है मशरूम?
मशरूम को “सुपरफूड” माना जाता है और यह बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है:
प्रोटीन और पोषण से भरपूर
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
विटामिन-डी का अच्छा स्रोत
हड्डियों और हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी
पाचन सुधारने में मददगार
वजन नियंत्रण और मधुमेह रोगियों के लिए उपयोगी
योजना का उद्देश्य
इस मिशन का मुख्य लक्ष्य है:
बच्चों को पोषणयुक्त मिड-डे मील देना
स्कूल स्तर पर आत्मनिर्भर खाद्य उत्पादन बढ़ाना
बच्चों में कृषि और विज्ञान के प्रति रुचि पैदा करना
यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो आने वाले समय में इसे पूरे हिमाचल के स्कूलों में लागू किया जा सकता है।
