सीबीएसई स्कूलों में जाने से शिक्षक हिचकिचा रहे, अब तक सिर्फ 4050 आवेदन
शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से जोड़ने की सरकार की बड़ी पहल को शिक्षकों से उम्मीद के मुताबिक प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है। चयनित 145 सीबीएसई संबद्ध स्कूलों में विभिन्न श्रेणियों के 5623 पदों को भरने के लिए अब तक केवल 4050 शिक्षकों ने ही ऑनलाइन आवेदन किया है, जिससे शिक्षा विभाग की चिंता बढ़ गई है।
नई व्यवस्था को लेकर असमंजस बना कारण
सूत्रों के अनुसार कई शिक्षक सीबीएसई प्रणाली, नई कार्यप्रणाली और परीक्षा पैटर्न को लेकर अभी भी असमंजस में हैं। वहीं कुछ शिक्षक वर्तमान तैनाती स्थल से संभावित स्थानांतरण के कारण भी आवेदन करने से बच रहे हैं। यही वजह है कि आवेदन की रफ्तार अपेक्षा से धीमी रही है।
प्रदेश सरकार ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और राष्ट्रीय स्तर के पाठ्यक्रम को लागू करने के उद्देश्य से 145 सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों को सीबीएसई से संबद्ध किया है। इन स्कूलों में पीजीटी, टीजीटी, भाषा अध्यापक, डीपीई समेत कई श्रेणियों के पद भरे जाने हैं।
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24 फरवरी तक सामान्य शुल्क, 27 तक लेट फीस
शिक्षा विभाग ने आवेदन के लिए 24 फरवरी तक 500 रुपये शुल्क तय किया है, जबकि 600 रुपये लेट फीस के साथ 27 फरवरी तक आवेदन किए जा सकेंगे। चयन प्रक्रिया के तहत 22 मार्च को स्क्रीनिंग परीक्षा आयोजित होगी, जिसके आधार पर मेरिट सूची तैयार की जाएगी।
इसके बाद दस्तावेज सत्यापन और काउंसिलिंग पूरी कर नए शैक्षणिक सत्र से नियुक्तियां दी जाएंगी। चयनित शिक्षकों को विषयवार वरीयता के आधार पर स्कूल आवंटित किए जाएंगे।
सरकार को अभी और आवेदन की उम्मीद
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि आवेदन प्रक्रिया अभी जारी है और उम्मीद है कि अंतिम तिथि तक बड़ी संख्या में शिक्षक आवेदन करेंगे। उन्होंने संकेत दिए कि यदि आवेदन कम रहे तो विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
किन पदों पर भर्ती
इस भर्ती प्रक्रिया के तहत प्रिंसिपल, विभिन्न विषयों के लेक्चरर, टीजीटी, भाषा अध्यापक, शास्त्री, ड्राइंग मास्टर, डीपीई और जेबीटी सहित कुल 5623 पदों को भरने के लिए आवेदन मांगे गए हैं।
क्यों अहम है यह पहल
हिमाचल प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि नए सत्र से सभी चयनित स्कूलों में पढ़ाई पूरी तरह सीबीएसई पैटर्न पर शुरू हो, ताकि छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धी शिक्षा मिल सके।
