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प्रदेश में कन्या-बाल स्कूलों को मिलाकर बनाया जाएगा को-एजुकेशन मॉडल, छात्रों को मिलेगा बोर्ड चुनने का विकल्प
शिमला। हिमाचल प्रदेश में अलग-अलग चल रहे कन्या और बाल विद्यालयों को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि जिन जगहों पर दोनों स्कूल अलग-अलग संचालित हो रहे हैं, वहां उन्हें स्कूल मर्ज कर को-एजुकेशन मॉडल में बदला जाएगा। इसके लिए शिक्षा विभाग की ओर से औपचारिक आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
सरकार की योजना के अनुसार, स्कूल मर्ज होने के बाद एक संस्थान को सीबीएसई से संबद्ध किया जाएगा, जबकि दूसरे को हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अधीन रखा जाएगा। मंत्री ने कहा कि इससे छात्रों को अपनी सुविधा और भविष्य की योजना के अनुसार बोर्ड चुनने का विकल्प मिलेगा।
मंडी से शुरू हो रही प्रक्रिया
मंडी शहर में इस नीति पर काम शुरू भी कर दिया गया है। यहां कन्या और बाल स्कूलों को स्कूल मर्ज कर सह-शिक्षा व्यवस्था में लाया जा रहा है। शिक्षा मंत्री ने अनौपचारिक बातचीत में बताया कि यह कदम संसाधनों के बेहतर उपयोग और छात्रों को अधिक विकल्प देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
तीन साल में 1300 स्कूल मर्ज
सरकार के आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में प्रदेश में करीब 1300 प्राइमरी स्कूल मर्ज किए जा चुके हैं। इसका मुख्य कारण कई स्कूलों में छात्रों की बेहद कम संख्या या शून्य नामांकन रहा है। ऐसे संस्थानों को नजदीकी स्कूलों में समायोजित किया गया।
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नामांकन में लगातार गिरावट
शिक्षा विभाग के मुताबिक, पिछले दो दशकों में सरकारी स्कूलों में दाखिले में तेज गिरावट आई है। करीब 20 वर्ष पहले कक्षा 1 से 8 तक लगभग 9.71 लाख छात्र नामांकित थे, जो अब घटकर करीब 4.2 लाख रह गए हैं। जन्म दर में कमी को भी इस गिरावट की बड़ी वजह माना जा रहा है।
सरकार का मानना है कि स्कूल मर्ज नीति से न केवल संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों को मिलने वाले विकल्प भी बढ़ेंगे।
