छोटी काशी मंडी में निकली बाबा भूतनाथ की दूसरी व अंतिम जलेब, देवधुनों से गूंजा शिवरात्रि महोत्सव
मंडी। छोटी काशी मंडी में अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के दौरान शुक्रवार को बाबा भूतनाथ की दूसरी व अंतिम जलेब शाही अंदाज में निकाली गई। ढोल-नगाड़ों, करनाल और रणसिंघा की गूंज के बीच निकली इस भव्य जलेब ने पूरे शहर को भक्तिमय माहौल में रंग दिया।
ब्यास तट से शुरू होकर शहरभर में निकली शाही जलेब
छोटी काशी मंडी में बाबा भूतनाथ की दूसरी व अंतिम जलेब का शुभारंभ खलियार स्थित ब्यास नदी तट से हुआ। जलेब पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों और देव परंपरा के साथ विक्टोरिया पुल, समखेतर, मोती बाजार, चौहटा बाजार, गांधी चौक, सेरी मंच और इंदिरा मार्केट होते हुए पुनः ब्यास तट पर संपन्न हुई।
इस दौरान स्थानीय देवी-देवताओं की पालकियों के साथ हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। छोटी काशी मंडी में निकाली जाने वाली बाबा भूतनाथ की दूसरी व अंतिम जलेब की परंपरा हाल के वर्षों में शुरू हुई है, लेकिन अब यह शिवरात्रि महोत्सव का प्रमुख आकर्षण बन चुकी है।
देवधुन और देवलु नाटी प्रतियोगिता का हुआ समापन
शिवरात्रि महोत्सव के अंतर्गत छोटी काशी मंडी में देवधुन/वाद्ययंत्र एवं देवलु नाटी प्रतियोगिताओं का अंतिम चरण भी सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। प्रतियोगिता में देव समाज और श्रद्धालुओं के बीच भारी उत्साह देखने को मिला।
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अतिरिक्त उपायुक्त गुरसिमर सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में विजेता दलों को सम्मानित करते हुए कहा कि शिवरात्रि महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हिमाचल की समृद्ध देव संस्कृति का जीवंत प्रतीक है।
85 देवताओं के बजंत्रियों ने दिखाया कौशल
देवधुन प्रतियोगिता में कुल 85 देवताओं के बजंत्रियों ने भाग लिया, जबकि देवलु नाटी में नौ दलों ने अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। ढोल-नगाड़ों, करनाल और रणसिंघा की गूंज से छोटी काशी मंडी का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
प्रतियोगिता परिणाम
देवधुन/वाद्ययंत्र श्रेणी
प्रथम: देव छमांहू खणी बालीचौकी
द्वितीय: देव अजयपाल कासला द्रंग
तृतीय: देव कांढलू बालाकामेश्वर बग्गी
देवलु नाटी श्रेणी
प्रथम: देव सुहड़े का गैहरी उतरशाल
द्वितीय: देव छांजणू बालीचौकी
तृतीय: देव श्री तुंगासी निहरी सराज
निर्णायक मंडल में मुरारी शर्मा, कृष्णा देवी और उमेश ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
देव संस्कृति की जीवंत झलक बनी जलेब
छोटी काशी मंडी में निकली बाबा भूतनाथ की दूसरी व अंतिम जलेब ने एक बार फिर यह साबित किया कि शिवरात्रि महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हिमाचल की लोक परंपराओं, देव संस्कृति और सामाजिक एकता का बड़ा प्रतीक है।
