शिमला। प्रदेश में विधवा महिलाओं की बेटियों की उच्च शिक्षा का सपना साकार करने की दिशा में हिमाचल प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य में शिक्षा की सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना का दायरा बढ़ा दिया गया है। अब योजना के तहत पात्र विधवा महिलाओं की बेटियों को प्रदेश के भीतर ही नहीं, बल्कि राज्य से बाहर भी उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
क्या है योजना का उद्देश्य
सरकार का मुख्य लक्ष्य इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना के माध्यम से विधवा, निराश्रित, तलाकशुदा महिलाओं और दिव्यांग अभिभावकों के बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में समग्र सहयोग देना है। इस पहल से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को पढ़ाई जारी रखने में मदद मिलेगी।
27 वर्ष तक मिलेगा लाभ
संशोधित प्रावधानों के अनुसार पात्र विधवाओं की बेटियों को अब 27 वर्ष की आयु तक योजना का लाभ दिया जाएगा। राज्य से बाहर सरकारी संस्थानों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम करने वाली छात्राओं को किराया या पीजी आवास के लिए अधिकतम 10 महीने तक प्रति माह 3,000 रुपये की वित्तीय सहायता मिलेगी। यह सहायता तब दी जाएगी जब सरकारी छात्रावास उपलब्ध न हो।
किन पाठ्यक्रमों को मिलेगा फायदा
इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना के तहत इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी, प्रबंधन, चिकित्सा, लॉ, आईटी, एजुकेशन, एससीवीटी पाठ्यक्रम, शिल्पकार प्रशिक्षण और पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग से जुड़े कार्यक्रम शामिल किए गए हैं।
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वर्तमान लाभ और बजट स्थिति
इस समय योजना के अंतर्गत पात्र बच्चों को 18 वर्ष तक मासिक वित्तीय सहायता दी जा रही है। साथ ही सरकारी संस्थानों में पढ़ने वाले लाभार्थियों की ट्यूशन फीस, हॉस्टल शुल्क और अन्य शैक्षणिक खर्च भी सरकार वहन कर रही है। वर्तमान में 18–27 आयु वर्ग की 504 छात्राएं योजना का लाभ ले रही हैं। अनुमान है कि इनमें से करीब 20% छात्राएं व्यावसायिक पाठ्यक्रम चुनेंगी, जिसके लिए लगभग 1 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक बजट रखा जाएगा।
वित्त वर्ष के लिए सरकार ने योजना में 31.01 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिनमें से 3 फरवरी 2026 तक 22.96 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री का बयान
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना का उद्देश्य लाभार्थियों को आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि आर्थिक तंगी उनकी शिक्षा में बाधा न बने।
