शिमला में नए सीबीएसई स्कूलों की पढ़ाई शुरू, किताबें और शिक्षक अब तक नहीं पहुंचे
शिमला। राजधानी में हाल ही में सीबीएसई बने सरकारी स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो गया है। विद्यार्थियों के दाखिले भी लगातार जारी हैं, लेकिन इन स्कूलों में अभी तक सीबीएसई किताबें नहीं पहुंची हैं और बोर्ड के तहत शिक्षक तैनाती भी पूरी नहीं हो सकी है। ऐसे में अभिभावकों और छात्रों को पढ़ाई प्रभावित होने की चिंता सताने लगी है।
शिक्षा विभाग ने फिलहाल व्यवस्था के तौर पर इन स्कूलों में हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम से पढ़ाई शुरू करवा दी है। विभाग का कहना है कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और राज्य बोर्ड दोनों ही एनसीईआरटी पैटर्न को फॉलो करते हैं, इसलिए विद्यार्थियों की पढ़ाई पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।
सरकार ने शिमला जिले के कुल 22 सरकारी स्कूलों को सीबीएसई में शामिल किया है। इनमें अधिकांश स्कूल शीतकालीन सत्र वाले हैं, जहां प्रवेश के साथ कक्षाएं भी शुरू हो चुकी हैं। अभी इन स्कूलों में पुराने बोर्ड के शिक्षक ही पढ़ा रहे हैं और राज्य बोर्ड की किताबों से पढ़ाई करवाई जा रही है।
शिक्षा विभाग का दावा है कि जल्द ही सभी सीबीएसई बने सरकारी स्कूलों में नई किताबें उपलब्ध करवा दी जाएंगी और चरणबद्ध तरीके से शिक्षक तैनाती भी पूरी कर ली जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि दोनों पाठ्यक्रमों में बहुत अधिक अंतर नहीं होने के कारण छात्रों को कोई शैक्षणिक नुकसान नहीं होगा।
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163 साल बाद लालपानी स्कूल में शुरू हुई सह-शिक्षा
राजधानी के ऐतिहासिक लालपानी स्कूल में इस वर्ष एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। स्कूल के सीबीएसई बनने के साथ ही यहां पहली बार सह-शिक्षा शुरू हुई है। स्थापना के करीब 163 वर्षों बाद अब छात्र-छात्राएं एक साथ पढ़ाई करेंगे।
नए सत्र में अब तक कुल 20 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया है, जिनमें पांच छात्राएं शामिल हैं। स्कूल प्रबंधन ने छात्राओं का स्वागत फूल मालाओं के साथ किया। पहले यहां छठी से बारहवीं तक केवल छात्र ही पढ़ते थे।
स्कूल प्रशासन का कहना है कि लालपानी स्कूल सह-शिक्षा शुरू होने से भविष्य में दाखिलों में बढ़ोतरी की संभावना है। वर्तमान में स्कूल में करीब 600 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और मार्च तक एडमिशन प्रक्रिया जारी रहेगी।
प्रधानाचार्य के अनुसार, सरकार के निर्देशों के बाद सह-शिक्षा लागू की गई है और आने वाले समय में छात्र संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
