सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा— एफटीए से आयातित फलों की बढ़ेगी आमद, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर के बागवानों को मिल सकता है कम दाम का
शिमला। सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) को लेकर हिमाचल और जम्मू और कश्मीर के सेब उत्पादकों की चिंता बढ़ने की बात कही है। गुरुवार को श्रीनगर में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि एफटीए के कारण आयातित सेब, अखरोट, बादाम और अन्य बागवानी उत्पादों की आमद बढ़ेगी, जिससे स्थानीय किसानों और बागवानों पर सीधा असर पड़ेगा। उनका कहना था कि जब बाजार में सस्ते विदेशी उत्पाद आएंगे तो प्रदेश के बागवानों को अपनी फसल का उचित मूल्य मिलने में मुश्किलें बढ़ेंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल और जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था में बागवानी की अहम भूमिका है और लाखों परिवार इसकी बदौलत अपनी आजीविका चलाते हैं। उन्होंने बताया कि हिमाचल की सेब अर्थव्यवस्था का सालाना कारोबार करीब 5 हजार करोड़ रुपये का है, जिससे लगभग ढाई लाख परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। वहीं जम्मू-कश्मीर में भी बड़ी आबादी सेब, अखरोट और बादाम जैसी फसलों पर निर्भर है।
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सुक्खू ने आरोप लगाया कि केंद्र द्वारा विभिन्न देशों के साथ हुए एफटीए के चलते आयात शुल्क में कमी आई है, जिसका सीधा असर घरेलू बागवानी क्षेत्र पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ऐसी नीतियों के परिणाम आने वाले समय में और स्पष्ट दिखाई देंगे तथा इससे किसानों की आय और बाजार संतुलन प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार इन समझौतों की समीक्षा करे ताकि देश के किसानों और बागवानों के हित सुरक्षित रह सकें। इस दौरान उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लगातार किसानों और आम लोगों के मुद्दे उठाते रहे हैं और उनकी आवाज को दबाने की कोशिशें सफल नहीं होंगी।
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मुख्यमंत्री ने दोहराया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस किसानों और बागवानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और उनके अधिकारों के लिए आगे भी आवाज उठाती रहेगी।
