लंबित मांगों को लेकर पेंशनर्स का शिमला में जोरदार प्रदर्शन, सरकार पर वादाखिलाफी के आरोप।
शिमला। हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने लंबित मांगों को लेकर मंगलवार को चौड़ा मैदान में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर की अगुवाई में हुए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पेंशनर्स शामिल हुए और हिमाचल प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
धरने को संबोधित करते हुए सुरेश ठाकुर ने कहा कि सरकार लगातार पेंशनर्स की मांगों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी धर्मशाला में हुए बड़े प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री ने बातचीत का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। उनका कहना है कि सरकार की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है।
वित्तीय स्थिति का दिया हवाला
समिति ने आरोप लगाया कि प्रदेश की खराब वित्तीय स्थिति का हवाला देकर पेंशनर्स की देनदारियां रोकी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने महंगाई भत्ता फ्रीज करने, बकाया भुगतान रोकने और विभिन्न योजनाओं में कटौती की बात कही है, जबकि जनप्रतिनिधियों के वेतन-भत्तों में वृद्धि जारी है।
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“पेंशनर्स-कर्मचारी विरोधी” करार
संघर्ष समिति का कहना है कि राजस्व अनुदान घाटा बंद होने का पेंशन और वेतन भुगतान से कोई सीधा संबंध नहीं है। समिति ने लोक सेवा आयोग के पदाधिकारियों की पेंशन बढ़ाने, विभिन्न बोर्ड-निगमों में नियुक्तियां करने और विधायकों-मंत्रियों के भत्ते बढ़ाने जैसे फैसलों पर भी सवाल उठाए।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
प्रदेश अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि पेंशनर्स की लंबित मांगों का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार वित्तीय कुप्रबंधन के कारण प्रदेश को संकट में डाल रही है और कर्मचारियों-पेंशनर्स की देनदारियों से पल्ला झाड़ रही है।
समिति ने मांग की है कि सरकार जल्द बातचीत कर लंबित भुगतान और महंगाई भत्ते सहित सभी मुद्दों का समाधान करे।
