नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल का कठोर कारावास, 10 हजार रुपये जुर्माना
शिमला। शिमला की फास्ट ट्रैक (पोक्सो) अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में आरोपी को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यदि जुर्माना अदा नहीं किया जाता, तो उसे अतिरिक्त छह महीने की सजा भुगतनी होगी।
अदालत ने पीड़िता के पुनर्वास के लिए चार लाख रुपये मुआवजा देने की सिफारिश जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजी है। यह मामला जिला शिमला के रोहड़ू क्षेत्र से जुड़ा है।
शादी का झांसा देकर ले गया था साथ
मामले के अनुसार, 17 अगस्त 2019 को आरोपी युवक नाबालिग को शादी का झांसा देकर अपने ननिहाल ले गया। जब लड़की घर नहीं लौटी तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। अगले दिन भी वापस न आने पर परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।
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पुलिस ने बरामद किया पीड़िता को
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और 22 अगस्त 2019 को आरोपी के ननिहाल से नाबालिग को बरामद कर लिया। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे परिजनों को सौंप दिया गया।
पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि आरोपी ने 17 से 22 अगस्त के बीच कई बार उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए।
फोरेंसिक सबूत बने मजबूत आधार
जांच के दौरान डीएनए और अन्य फोरेंसिक रिपोर्ट आरोपी के खिलाफ पुख्ता साबित हुईं। वहीं स्कूल रिकॉर्ड और पंचायत प्रमाणपत्र से लड़की की उम्र 15 वर्ष सिद्ध हुई।
पुलिस ने जांच पूरी कर अदालत में चालान पेश किया, जिसके आधार पर अदालत ने आरोपी को दुष्कर्म और पोक्सो अधिनियम की गंभीर धाराओं में दोषी ठहराया। हालांकि अपहरण से संबंधित कुछ धाराओं में उसे बरी किया गया।
अदालत की सख्त टिप्पणी
अदालत ने कहा कि पीड़िता की गवाही विश्वसनीय रही और स्वतंत्र गवाहों व वैज्ञानिक साक्ष्यों ने मामले को मजबूत किया। बचाव पक्ष के तर्कों को खारिज करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि नाबालिग की सहमति कानूनी रूप से मान्य नहीं होती, भले ही आरोपी ने शादी का इरादा होने का दावा किया हो।
इस तरह अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कड़ी सजा सुनाते हुए पीड़िता के पुनर्वास पर भी विशेष जोर दिया।
