विधानसभा बजट सत्र के लिए सुरक्षा इंतजाम पुख्ता
शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा बजट सत्र को शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस ने व्यापक सुरक्षा योजना लागू कर दी है। सत्र के मद्देनजर विधानसभा परिसर से लेकर शहर के प्रमुख प्रवेश मार्गों तक कड़ी निगरानी रखी जा रही है। खास तौर पर तवी मोड़, शोघी और अन्य संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार संभावित धरना-प्रदर्शन, रैलियों और भीड़भाड़ की आशंका को देखते हुए विधानसभा क्षेत्र और आसपास के इलाकों को चार सुरक्षा सेक्टरों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक सेक्टर की जिम्मेदारी राजपत्रित पुलिस अधिकारियों को सौंपी गई है, जो अपने-अपने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करेंगे।
सत्र के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कुल 872 पुलिस अधिकारी और जवान ड्यूटी पर तैनात रहेंगे। इनमें 15 राजपत्रित अधिकारी, 30 अराजपत्रित अधिकारी, 66 मुख्य आरक्षी, 375 आरक्षी, 47 महिला आरक्षी और 16 कम्युनिकेशन स्टाफ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 200 होमगार्ड जवान, क्विक रिएक्शन टीम, विशेष सुरक्षा इकाई और अन्य विशेष बलों के 75 प्रशिक्षित कमांडो भी विभिन्न महत्वपूर्ण स्थानों पर तैनात किए गए हैं।
पुलिस की विशेष शाखा और राज्य अन्वेषण विभाग के कर्मचारी सादे कपड़ों में भी तैनात रहेंगे, जो संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखेंगे। सुरक्षा को और सुदृढ़ बनाने के लिए सीसीटीवी कैमरों के साथ डिजिटल वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी और ड्रोन के जरिए भी लगातार निगरानी की जाएगी।
शिमला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने आम नागरिकों से सुरक्षा जांच में सहयोग करने, अफवाहों से दूर रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की है।
यातायात व्यवस्था पर भी विशेष फोकस
विधानसभा सत्र के दौरान शहर में यातायात को सुचारू बनाए रखने के लिए अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। एक राजपत्रित अधिकारी की निगरानी में ट्रैफिक पुलिस के 50 अतिरिक्त जवानों और 30 होमगार्ड कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। सोमवार से लागू इस व्यवस्था के बाद पीक ऑवर्स में लगने वाले जाम से राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
इस तरह पुलिस प्रशासन ने विधानसभा सत्र को लेकर सुरक्षा और यातायात दोनों मोर्चों पर व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं, ताकि आम जनता और जनप्रतिनिधियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
