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हिमाचल प्रदेश को राहत: निजी भूमि पर खैर कटान पर नहीं है पूर्ण रोक
शिमला, 13 फरवरी 2026: हिमाचल प्रदेश में निजी भूमि पर खैर कटान को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि निजी जमीन पर खड़े सूखे, गिरे हुए, सड़े-गले या फफूंदग्रस्त खैर के पेड़ों की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लागू नहीं है। अदालत ने कहा कि निजी भूमि पर खैर कटान की अनुमति पहले भी अपने आदेशों में दी जा चुकी है।
अदालत ने पुराने आदेशों का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि वर्ष 1996 में पहाड़ी क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई पर जो रोक लगाई गई थी, उसे बाद में संशोधित किया जा चुका है। अदालत ने स्पष्ट किया कि 16 फरवरी 2018 और 10 मई 2023 के आदेशों में निजी भूमि पर खैर कटान की अनुमति विशेष परिस्थितियों में दी गई थी।
अनुमति न मिलने पर कोर्ट पहुंचे थे याचिकाकर्ता
याचिकाकर्ताओं ने पहले जिला वन अधिकारी से सूखे खैर पेड़ काटने की मंजूरी मांगी थी, लेकिन अनुमति नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि निजी भूमि पर खैर कटान से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए एक समिति गठित की जाए।
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निजी एजेंसियों को ठेका देने पर रोक
अदालत ने अपने पुराने निर्देशों को दोहराते हुए कहा कि निजी भूमि पर खैर कटान का काम निजी ठेकेदारों को नहीं दिया जाएगा। यह कार्य केवल वन विभाग या हिमाचल प्रदेश राज्य वन निगम के माध्यम से ही कराया जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण के लिए सख्त शर्तें
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि:
कटाई से पहले, दौरान और बाद में वीडियोग्राफी अनिवार्य होगी।
कम से कम 25 प्रतिशत परिपक्व खैर पेड़ों को “मदर ट्री” के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा। सभी मामलों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी होगा।
क्या होगा फैसले का असर
इस निर्णय से जमीन मालिकों को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि अब सूखे और बेकार हो चुके पेड़ों के मामले में निजी भूमि पर खैर कटान को लेकर कानूनी अड़चनें कम होंगी। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
