केरल की धरती पर बिखरे सिरमौर की हाटी लोकसंस्कृति के रंग
राजगढ़ (सिरमौर)। पर्यटन के लिए प्रसिद्ध राज्य केरल में इन दिनों हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की समृद्ध हाटी लोकसंस्कृति अपनी अनूठी छटा बिखेर रही है। आसरा संस्था पझौता से जुड़े लोक कलाकार केरल में अपनी सशक्त प्रस्तुतियों के माध्यम से गिरीपार क्षेत्र की पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिला रहे हैं।
आसरा संस्था के प्रभारी डॉ. जोगेंद्र हाब्बी ने जारी एक प्रेस वक्तव्य में बताया कि संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के अंतर्गत दक्षिण क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र, तंजावूर के सहयोग से संस्था के कलाकारों ने सात से नौ फरवरी तक केरल में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से सिरमौर की प्राचीन लोक विधाओं को दर्शकों तक पहुँचाया गया।
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गोपाल हाब्बी के नेतृत्व में कलाकारों के दल ने गिरीपार हाटी जनजातीय क्षेत्र से जुड़ी शाठी-पाशी परंपराओं पर आधारित ठोडा नृत्य, मुंजरा नाटी, रिहाल्टी गी, रासा नृत्य, दीपक नृत्य, परात नृत्य, पारंपरिक पढुआं नृत्य तथा धीरे-धीरे विलुप्त हो रही ढीली नाटी का प्रभावशाली मंचन किया। इन प्रस्तुतियों ने केरल के दर्शकों को सिरमौर की हाटी लोकसंस्कृति से रू-बरू कराते हुए मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रमों में लोकगायक रामलाल वर्मा, बिमला चौहान, संदीप, हंसराज, प्रेम और देवीराम की गायन प्रस्तुतियों ने भी विशेष आकर्षण बटोरा। कलाकारों की सामूहिक प्रस्तुति ने यह सिद्ध कर दिया कि सिरमौर की लोकसंस्कृति आज भी जीवंत है और देश के कोने-कोने में अपनी अलग पहचान बना रही है।
