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हिमाचल में केसीसी ऋण घोटाला: पूर्व पीएनबी मैनेजर समेत तीन दोषियों को सजा, सीबीआई अदालत का बड़ा फैसला
शिमला। हिमाचल प्रदेश में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के जरिए हुए ऋण घोटाले के एक पुराने मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। पंजाब नेशनल बैंक की कुल्लू जिले की ढालपुर शाखा से जुड़े इस मामले में अदालत ने पूर्व बैंक मैनेजर सहित तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए जेल और जुर्माने की सजा सुनाई है।
सीबीआई की विशेष अदालत शिमला ने पूर्व शाखा प्रबंधक अमर सिंह बोध को तीन वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। वहीं, ऋण लाभार्थी भोलू राम और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले ताशी फुंचोग को चार-चार साल की कैद और 1.10 लाख रुपये जुर्माने की सजा दी गई है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में सभी को अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
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हिमाचल में केसीसी ऋण घोटाला: फर्जी रिकॉर्ड के सहारे कराया गया ऋण
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि वर्ष 2010 से 2013 के बीच आरोपियों ने आपसी साठगांठ से फर्जी जमाबंदी और राजस्व रिकॉर्ड का इस्तेमाल कर चार लाख रुपये का केसीसी ऋण मंजूर कराया। विशेषज्ञ जांच में यह बात सामने आई कि राजस्व अधिकारियों के नाम से लगाए गए हस्ताक्षर और मुहरें नकली थीं, जबकि ऋण दस्तावेजों पर मौजूद हस्ताक्षर आरोपियों के ही पाए गए।
जांच किए बिना दी गई ऋण स्वीकृति
अदालत ने यह भी माना कि उस समय ढालपुर शाखा में तैनात मैनेजर अमर सिंह बोध ने दस्तावेजों की प्रामाणिकता की जांच किए बिना ऋण को आगे बढ़ाया। पद का दुरुपयोग करते हुए उन्होंने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर इस साजिश को अंजाम दिया।
भ्रष्टाचार और जालसाजी में दोष सिद्ध
विशेष न्यायाधीश डॉ. परविंदर सिंह अरोड़ा ने कहा कि हिमाचल में केसीसी ऋण घोटाला करने वाले तीनों आरोपी प्रस्तुत साक्ष्य और गवाहों के आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाए गए।
ऐसे दर्ज हुआ था मामला
हिमाचल में केसीसी ऋण घोटाला 11 अप्रैल 2015 को शुरू हुआ, जब पीएनबी के सर्कल प्रमुख राजीव खन्ना की शिकायत पर सीबीआई शिमला शाखा ने प्राथमिकी दर्ज की। जांच में धोखाधड़ी, जालसाजी, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार से जुड़ी धाराएं जोड़ी गई थीं।
