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एम्स बिलासपुर में स्वास्थ्य सेवाओं में एक और नई पहल, एक सैंपल से 22 बीमारियों की जांच | Big Initiative

by Dainik Janvarta
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एम्स बिलासपुर में स्वास्थ्य सेवाओं में एक और नई पहल, एक सैंपल से 22 बीमारियों की पहचान संभव

बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को मजबूती देते हुए एम्स बिलासपुर ने स्वास्थ्य सेवाओं में एक और नई पहल की है। अब गंभीर संक्रमण से जूझ रहे मरीजों को जांच रिपोर्ट के लिए कई दिन इंतजार नहीं करना पड़ेगा। एम्स अस्पताल में प्रशासन अत्याधुनिक फिल्म ऐरे मल्टीप्लेक्स पीसीआर मशीन स्थापित करने जा रहा है, जिससे महज एक घंटे में 22 से अधिक बीमारियों की सटीक पहचान संभव हो सकेगी।

यह मशीन उन मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित होगी, जिनकी हालत रिपोर्ट में देरी के कारण लगातार बिगड़ जाती है। एम्स प्रबंधन ने इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसे फरवरी के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह कदम न केवल संस्थान की क्षमताओं को बढ़ाएगा, बल्कि हिमाचल में स्वास्थ्य सेवाओं में एक और नई पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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अब बाहर नहीं भेजने पड़ेंगे सैंपल

वर्तमान में दिमागी बुखार, सेप्सिस या गंभीर संक्रमण के मामलों में सैंपल को चंडीगढ़ स्थित पीजीआई या अन्य बाहरी लैब भेजना पड़ता है। रिपोर्ट आने में तीन से सात दिन तक का समय लग जाता है, जिससे कई बार मरीज की जान को खतरा हो जाता है। लेकिन एम्स बिलासपुर में यह मशीन लगने के बाद पूरी जांच प्रक्रिया अस्पताल परिसर के भीतर ही पूरी हो सकेगी, जो स्वास्थ्य सेवाओं में एक और नई पहल को मजबूती देगी।

एक सैंपल, पूरी बीमारी की तस्वीर साफ

फिल्म ऐरे मशीन सिंड्रोमिक टेस्टिंग तकनीक पर आधारित है। अगर किसी मरीज को तेज बुखार है, तो अब अलग-अलग जांच कराने की जरूरत नहीं होगी। यह मशीन एक ही सैंपल से डेंगू, मलेरिया, स्वाइन फ्लू, बैक्टीरियल इंफेक्शन समेत 22 से ज्यादा वायरस और बैक्टीरिया की पहचान कर लेगी। यह तकनीक खासकर आईसीयू मरीजों के लिए बेहद कारगर मानी जा रही है और इसे एक सराहनीय पहल कहा जा सकता है।

सेप्सिस मरीजों के लिए वरदान

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, सेप्सिस के मामलों में हर एक घंटे की देरी मृत्यु दर को करीब आठ प्रतिशत तक बढ़ा देती है। यह मशीन सिर्फ 60 मिनट में यह स्पष्ट कर देगी कि संक्रमण किस कारण से हुआ है, जिससे डॉक्टर गोल्डन ऑवर में ही सटीक इलाज शुरू कर सकेंगे। इससे एंटीबायोटिक का अनावश्यक इस्तेमाल भी रुकेगा, जो आज के समय में एक गंभीर समस्या बन चुका है। इस पहल से मरीजों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

किन मरीजों को होगा सीधा लाभ

गंभीर निमोनिया, दिमागी बुखार, दस्त और रक्त संक्रमण से पीड़ित मरीजों को इस नई सुविधा का सीधा लाभ मिलेगा। जहां निजी लैब में यह जांच बेहद महंगी होती है, वहीं एम्स बिलासपुर में यह टेस्ट रियायती दरों पर उपलब्ध होगा। माइक्रोबायोलॉजी विभाग को इस मशीन से लैस किया जा रहा है, जिससे संस्थान की डायग्नोस्टिक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।

कुल मिलाकर, एम्स बिलासपुर की यह पहल हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में एक और नई पहल के रूप में मील का पत्थर साबित होगी, जो समय पर इलाज, कम खर्च और बेहतर स्वास्थ्य परिणामों की दिशा में एक मजबूत कदम है।

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