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सैनिक स्कूल सुजानपुर टिहरा रैगिंग केस: छात्रों के साथ स्टाफ भी घेरे में
नौ आरोपियों पर पुलिस का शिकंजा
हमीरपुर। जिला हमीरपुर के सैनिक स्कूल सुजानपुर टिहरा में आठवीं कक्षा के छात्र के साथ हुई रैगिंग और शारीरिक उत्पीड़न की घटना ने अब गंभीर कानूनी मोड़ ले लिया है। करीब दो माह चली पुलिस जांच के बाद इस बहुचर्चित मामले में कुल नौ आरोपियों के खिलाफ चालान तैयार कर लिया गया है, जिसे शीघ्र ही जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड और जिला न्यायालय में पेश किया जाएगा।
पुलिस ने सैनिक स्कूल सुजानपुर टिहरा रैगिंग मामले में पॉक्सो एक्ट और एंटी रैगिंग कानून की अलग-अलग धाराएं लगाई हैं। आरोपियों में जहां छह छात्र शामिल हैं, वहीं तीन स्टाफ सदस्य भी जांच में दोषी पाए गए हैं। इससे साफ हो गया है कि मामला केवल छात्र स्तर तक सीमित नहीं था, बल्कि संस्थागत लापरवाही भी इसमें सामने आई है।
ई-मेल शिकायत से शुरू हुआ पूरा मामला
यह मामला दिसंबर 2025 में तब उजागर हुआ, जब पीड़ित छात्र के पिता ने ई-मेल के जरिए स्कूल प्रशासन को अपने बेटे के साथ हुई प्रताड़ना की जानकारी दी। इसके बाद स्कूल की एंटी रैगिंग कमेटी ने आंतरिक जांच की, जिसमें बारहवीं कक्षा के एक छात्र को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया था, हालांकि बाद में उसे दोबारा बहाल कर दिया गया।
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लेकिन इस कार्रवाई से असंतुष्ट होकर पीड़ित के पिता ने 1 दिसंबर को पुलिस अधीक्षक को औपचारिक शिकायत सौंपी। इसके आधार पर सुजानपुर थाना में एफआईआर दर्ज हुई और पुलिस ने विस्तृत जांच शुरू की।
सैनिक स्कूल सुजानपुर टिहरा में रैगिंग की जांच में सामने आई वार्डन स्तर की लापरवाही
पुलिस जांच के दौरान केवल सीनियर छात्रों की भूमिका ही नहीं, बल्कि वार्डन और स्कूल प्रबंधन से जुड़े एक अधिकारी की लापरवाही भी सामने आई। जांच एजेंसी ने इसे गंभीर चूक मानते हुए संबंधित अधिकारी को भी एफआईआर में नामजद किया है।
एनडीए चयनित छात्रों का भविष्य अधर में
इस मामले का सबसे बड़ा असर उन चार छात्रों पर पड़ा है, जो पहले ही एनडीए के लिए चयनित हो चुके हैं। रैगिंग केस में नाम आने से अब उनके सैन्य करियर पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
पीड़ित छात्र चंबा जिले का रहने वाला है और उसके पिता स्वयं पुलिस विभाग में कार्यरत हैं। छात्र ने बयान में सीनियर छात्रों द्वारा शारीरिक प्रताड़ना के साथ-साथ मानसिक उत्पीड़न की बात कही है।
जल्द कोर्ट में पहुंचेगा मामला
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, चालान एक-दो दिन के भीतर संबंधित न्यायालयों में दाखिल कर दिया जाएगा। इसके बाद मामले की सुनवाई शुरू होगी और दोषियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।
