Mandi News: विकास कार्यों में अनियमितताओं पर सुधराणी पंचायत पदाधिकारियों का निलंबन
प्रधान-उपप्रधान सहित 05 प्रतिनिधि हटाए गए
मंडी। मंडी जिले के उपमंडल बालीचौकी अंतर्गत ग्राम पंचायत सुधराणी एक बार फिर सुर्खियों में है। विकास कार्यों में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद सुधराणी पंचायत पदाधिकारियों के निलंबन की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। जिला पंचायत अधिकारी ने पंचायत के प्रधान, उपप्रधान और तीन निर्वाचित सदस्यों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह फैसला जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया।
जानकारी के अनुसार पंचायत में मनरेगा सहित अन्य सरकारी योजनाओं के तहत किए गए विकास कार्यों में नियमों की अनदेखी की गई। शिकायतकर्ता चुनी लाल द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद विकास खंड स्तर पर एक जांच समिति गठित की गई थी। समिति ने मौके पर निरीक्षण कर दस्तावेजों की जांच की, जिसमें कई स्तरों पर वित्तीय गड़बड़ियां सामने आईं।
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जांच रिपोर्ट में यह पाया गया कि कुछ कार्यों में ठेकेदारों को तय राशि से अधिक भुगतान किया गया, वहीं कई विकास कार्यों में प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इसके बाद रिपोर्ट जिला पंचायत अधिकारी को सौंपी गई, जिसके आधार पर पंचायत पदाधिकारियों के निलंबन के आदेश जारी किए गए।
प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि निलंबित सभी पंचायत प्रतिनिधियों को पहले कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। निर्धारित समयावधि में संतोषजनक जवाब न मिलने पर यह कठोर कदम उठाया गया। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी धन के दुरुपयोग के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हालांकि इस कार्रवाई के बाद पंचायत में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। निलंबित प्रधान और उपप्रधान ने सुधराणी पंचायत पदाधिकारियों के निलंबन को राजनीतिक साजिश करार दिया है। उनका आरोप है कि पंचायतों का कार्यकाल 31 जनवरी 2026 को समाप्त हो रहा है और चुनाव से ठीक पहले इस तरह की कार्रवाई करना संदेह पैदा करता है।
उपप्रधान संत राम का कहना है कि अगर उन्होंने कोई घोटाला किया होता तो कार्रवाई पहले ही हो चुकी होती। उन्होंने दावा किया कि चुनाव से कुछ दिन पहले किया गया निलंबन उन्हें राजनीतिक रूप से कमजोर करने की कोशिश है। वहीं प्रधान केशव राम ने भी इस फैसले को तर्कहीन बताते हुए न्यायालय में चुनौती देने की बात कही है।
दूसरी ओर, विकास खंड अधिकारी बालीचौकी भूपनेश चड्ढा ने कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष रही और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर ही रिपोर्ट तैयार की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुधराणी पंचायत पदाधिकारियों का निलंबन किसी दबाव में नहीं बल्कि नियमों के तहत किया गया है।
फिलहाल इस कार्रवाई से पंचायत क्षेत्र में चर्चाओं का दौर जारी है। आने वाले दिनों में यह मामला प्रशासनिक स्तर से लेकर न्यायालय तक पहुंच सकता है, जिससे पंचायत चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल और अधिक गर्माने की संभावना है।
