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हिमाचल में निजी बीएड कॉलेजों का संकट, 1,019 सीटें खाली; कोर्स बंद करने पर विचार | Big Update

by Dainik Janvarta
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हिमाचल में निजी बीएड कॉलेजों की बढ़ती चिंता, 1,019 सीटें खाली रहने से संकट गहराया

शिमला: हिमाचल प्रदेश में शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ी संस्थाओं के सामने इस सत्र एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। हिमाचल निजी बीएड कॉलेज सीटें खाली रहने का मुद्दा अब केवल प्रवेश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह कई संस्थानों के अस्तित्व पर सवाल खड़े कर रहा है। शैक्षणिक सत्र 2025–26 में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) से संबद्ध निजी बीएड कॉलेजों की कुल 1,019 सीटें रिक्त रह गई हैं, जो पिछले वर्षों की तुलना में चिंताजनक संकेत हैं।

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एचपीयू द्वारा जारी अंतिम प्रवेश सूची के अनुसार इस सत्र में कुल 5,031 सीटों पर ही दाखिले हो सके। विश्वविद्यालय और कॉलेज प्रबंधन ने सीटें भरने के लिए हरसंभव प्रयास किए, जिनमें 10 प्रतिशत अंकों की छूट, ऑनलाइन काउंसलिंग और ऑफलाइन स्पॉट काउंसलिंग जैसे कदम शामिल थे। इसके बावजूद हिमाचल निजी बीएड कॉलेज सीटें खाली रहने की समस्या दूर नहीं हो सकी।

निजी कॉलेजों पर ज्यादा असर

सरकारी संस्थानों की तुलना में निजी बीएड कॉलेजों को इस स्थिति से अधिक नुकसान हुआ है। आंकड़ों के अनुसार निजी कॉलेजों में हिमाचल प्रदेश कोटे की लगभग 840 सीटें और मैनेजमेंट कोटे की करीब 179 सीटें खाली रह गईं। इससे कॉलेजों की आय पर सीधा असर पड़ा है, क्योंकि अधिकांश निजी संस्थान फीस पर ही निर्भर होते हैं। हिमाचल निजी बीएड कॉलेज सीटें खाली रहने से कई कॉलेजों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।

कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि कम दाखिलों के कारण शिक्षकों के वेतन, इंफ्रास्ट्रक्चर के रखरखाव और प्रशासनिक खर्चों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। कुछ संस्थानों ने तो बीएड कोर्स को पूरी तरह बंद करने पर भी विचार शुरू कर दिया है।

क्यों घट रही है छात्रों की रुचि

विशेषज्ञों और विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार इस स्थिति के पीछे कई कारण हैं। निजी कॉलेजों की अधिक फीस, हॉस्टल और अन्य खर्च छात्रों के लिए बड़ी बाधा बन रहे हैं। इसके अलावा बीएड करने के बाद सरकारी नौकरी की सीमित संभावनाएं भी युवाओं को इस कोर्स से दूर कर रही हैं। यही वजह है कि हिमाचल निजी बीएड कॉलेज सीटें खाली रहने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है।
कई छात्रों ने यह भी माना है कि वे बीएड की बजाय अन्य प्रोफेशनल कोर्स या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में दाखिलों पर नकारात्मक असर पड़ा है।

भविष्य को लेकर चिंता

कॉलेज संचालकों का कहना है कि यदि अगले सत्र में भी यही हालात बने रहे, तो बीएड कोर्स चलाना आर्थिक रूप से संभव नहीं होगा। ऐसे में राज्य शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय स्तर पर ठोस नीति और सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत महसूस की जा रही है। अगर समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में हिमाचल निजी बीएड कॉलेज सीटें खाली रहने का संकट और गहरा सकता है, जिसका असर प्रदेश की शिक्षक शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ेगा।

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