करीब 2 करोड़ की लागत से बन रहा बहुउद्देशीय भंडारा स्थल
एक साथ 2000 श्रद्धालु कर सकेंगे भोजन प्रसाद ग्रहण
कालाअंब (सिरमौर)। औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब से सटे प्रसिद्ध शक्तिपीठ त्रिलोकपुर में श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए निर्माणाधीन भंडारा स्थल अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। मंदिर न्यास द्वारा इस बहुप्रतीक्षित परियोजना को वर्ष 2023 में शुरू किया गया था, जिस पर अब तक करीब 1 करोड़ 40 लाख रुपये की राशि खर्च की जा चुकी है, जबकि लगभग 50 लाख रुपये का कार्य अभी शेष है।
न्यास का उद्देश्य नवरात्र मेलों और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान होने वाले भंडारों को एक सुव्यवस्थित, स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध करवाना है। पहले भंडारों का आयोजन वाटरप्रूफ टेंटों में किया जाता था, जहां मौसम की मार और व्यवस्थागत समस्याएं अक्सर श्रद्धालुओं और आयोजकों के लिए परेशानी का कारण बनती थीं। भंडारा स्थल के निर्माण से इन समस्याओं का स्थायी समाधान मिलेगा।
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यह भंडारा स्थल पांच अलग-अलग खंडों में विकसित किया जा रहा है। प्रत्येक खंड इस तरह डिजाइन किया गया है कि यहां एक साथ पांच से छह भंडारों का व्यवस्थित आयोजन संभव हो सके। एक समय में लगभग 2000 श्रद्धालु यहां भोजन प्रसाद ग्रहण कर सकेंगे। भंडारा आयोजन के लिए प्रति खंड 6100 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही सफाई व्यवस्था को भी पहले से अधिक सुदृढ़ और आधुनिक बनाया जा रहा है।
मंदिर न्यास के अनुसार, भंडारा स्थल का उपयोग केवल भंडारों तक सीमित नहीं रहेगा। यहां शादी-विवाह, जागरण और माता की चौकी जैसे मांगलिक व धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा सकेगा। विवाह समारोह के लिए एसी, विद्युत और जनरेटर सुविधा सहित 75,000 रुपये शुल्क तय किया गया है। वहीं, चार घंटे की माता की चौकी के लिए 31,000 रुपये और पूर्ण जागरण के लिए 51,000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। त्रिलोकपुर पंचायत के स्थानीय ग्रामीणों और मंदिर ट्रस्टियों को विवाह शुल्क में 14,000 रुपये की छूट दी जाएगी, जिसके बाद उनके लिए यह शुल्क 61,000 रुपये रहेगा।
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मंदिर न्यास समिति के उपाध्यक्ष एवं एसडीएम नाहन राजीव संख्यान ने बताया कि लगभग 2 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा भंडारा स्थल श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी सौगात साबित होगा। इसके पूर्ण होने पर न केवल भंडारा आयोजन समितियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि त्रिलोकपुर पहुंचने वाले लाखों श्रद्धालुओं को भी सीधा लाभ होगा। उन्होंने कहा कि यह स्थल बहुउद्देशीय उपयोग को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है, जिससे धार्मिक के साथ-साथ सामाजिक कार्यक्रमों के लिए भी एक सुव्यवस्थित और किफायती विकल्प उपलब्ध हो।
