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जिला सिरमौर के दुर्गम क्षेत्रों में लचर परिवहन व्यवस्था
यात्रियों की मजबूरी बनती जा रही बसों की भीड़
नाहन (सिरमौर)। जिला सिरमौर के दुर्गम क्षेत्रों में लचर परिवहन व्यवस्था लगातार बदहाल होती जा रही है। सीमित बस सेवाओं के चलते यात्रियों को मजबूरी में ओवरलोड बसों में सफर करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि कई रूटों पर एक-दो बसों के भरोसे ही पूरा क्षेत्र चल रहा है, जिससे सुबह और शाम के समय यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है।
एक ओर जहां परिवहन संसाधनों की कमी यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर जर्जर सड़कों की हालत हादसों को न्योता दे रही है। कई ग्रामीण मार्गों पर सड़कें संकरी हैं, जगह-जगह गड्ढे और सुरक्षा साधनों का अभाव है। ऐसे में ओवरलोड बसों का इन सड़कों पर चलना खतरे से खाली नहीं है।
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हादसों के बाद नहीं, हादसे रोकने के लिए हों ठोस प्रयास
पिछले कुछ समय में जिले के विभिन्न हिस्सों में हुए सड़क हादसों ने परिवहन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन अक्सर हादसे के बाद जांच और औपचारिक कार्रवाई तक सीमित रह जाता है, जबकि जरूरत इस बात की है कि हादसों को रोकने के लिए स्थायी और ठोस कदम उठाए जाएं।
ग्रामीण क्षेत्रों से रोजाना स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और कामकाज के लिए सफर करने वाले यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। लोगों ने कहा कि कई बार बसों में पैर रखने तक की जगह नहीं होती, फिर भी मजबूरी में यात्रा करनी पड़ती है।
ओवरलोडिंग पर रोक और बसों की संख्या बढ़ाने की मांग
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि समय रहते परिवहन साधनों की संख्या नहीं बढ़ाई गई तो भविष्य में हालात और गंभीर हो सकते हैं। लोगों ने कहा कि सरकार और परिवहन विभाग को चाहिए कि दुर्गम रूटों पर अतिरिक्त बसें चलाए, ताकि यात्रियों को राहत मिल सके और ओवरलोडिंग पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
इसके साथ ही सड़कों की नियमित मरम्मत, सुरक्षा के लिए पैराफिट, क्रास बैरियर का निर्माण और खतरनाक मोड़ों पर संकेतक लगाने की भी मांग उठाई जा रही है। क्षेत्र के लोगों में रोहित शर्मा, राज ठाकुर, प्रदीप, राजेश चौहान, तपेंद्र चौहान, सुरेन्द्र सिंह और कमल शर्मा ने कहा कि सुरक्षित सड़कें और पर्याप्त परिवहन साधन ही हादसों को कम कर सकते हैं।
जनता की प्रशासन से सीधी अपील
दुर्गम क्षेत्रों में लचर परिवहन व्यवस्था और सड़कों की दुर्दशा को लेकर जिले की जनता ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि सड़कों को केवल औपचारिक रूप से नहीं, बल्कि वास्तव में सफर के लिए सुरक्षित बनाया जाए। साथ ही ओवरलोडिंग रोकने के लिए परिवहन संसाधनों में बढ़ोतरी की जाए, ताकि लोगों को सुरक्षित और सुगम यात्रा का अधिकार मिल सके।
बहरहाल, देखना यह होगा कि प्रशासन इन मांगों को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या दुर्गम क्षेत्रों में लचर परिवहन व्यवस्था और बदहाल सड़कों से लोगों को जल्द राहत मिल पाती है या नहीं।
