बस हादसे बार-बार क्यों? हरिपुरधार दुर्घटना ने उठाए गंभीर सवाल
नाहन (सिरमौर)। जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र में माघी पर्व की तैयारियां चल रही थी। लोग हर्षोल्लास से माघी की तैयारियों में जुटे हुए थे। लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। जहां खुशी का माहौल था, वहाँ शुक्रवार को हुए बस हादसे के बाद एकदम मातम छा गया। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की असफलता का आईना है।
शुक्रवार को हरिपुरधार बस हादसा उन परिवारों के लिए माघी पर्व की खुशियों पर ग्रहण लगा गया, जिनके परिवार के सदस्य इस हादसे में हमेशा के लिए खो गए। हृदयविदारक इस घटना ने सिर्फ गिरिपार क्षेत्र को ही नहीं बल्कि पूरे सिरमौर जिले सहित समूचे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। हालांकि, ऐसा हादसा पहली बार नहीं हुआ, इससे पहले भी ऐसे कई हादसे जिले में हो चुके हैं। कई जानें इन हादसों में जा चुकी हैं। सवाल यह है कि –
क्या पर्वतीय क्षेत्रों में ओवरलोडिंग पर सख़्ती हो रही है?
क्या यात्री सुरक्षा केवल जांच आदेशों तक सीमित है?
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हरिपुरधार क्षेत्र में हुए इस भीषण बस हादसे ने एक बार फिर यातायात नियमों के उल्लंघन की ओर इशारा किया है। हरिपुरधार के समीप शुक्रवार दोपहर 2:40 बजे एक ओवरलोड निजी बस 100 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। इस हादसे में 14 लोगों की मौत हो गई और 60 यात्री घायल हुए, जबकि एक यात्री को कम चोटें आईं और उसे अस्पताल से घर भेज दिया गया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बस में 75 यात्री सवार थे जो निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक थे।
इनमें 20 यात्री नाहन मेडिकल कॉलेज, सोलन अस्पताल में 20 और सिविल अस्पताल राजगढ़ में भी 20 यात्री उपचाराधीन हैं। हालांकि, प्रारम्भिक जांच में सड़क पर जमे पाले की वजह से ये हादसा हुआ बताया जा रहा है।
बहरहाल, सरकार और जिला प्रशासन ने हादसे की जांच के आदेश दिए हैं। जिन परिवारों ने इस हादसे में अपनों को हमेशा के लिए खोया है, उनका दुःख असहनीय है। आज गिरिपार क्षेत्र के गांव – गांव में पसरा मातम सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने की चीख चीख कर दुहाई दे रहा है। अगर इस ओर अभी भी ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में सफर करना जोखिमपूर्ण ही नहीं असुरक्षित भी बना रहेगा। हर हादसे के बाद जांच बैठती है, लेकिन सवाल यह है कि क्या अगला हादसा रोकने की तैयारी भी होती है?
