IGMC Shimla के रेजिडेंट डॉक्टर, इंटर्न और मेडिकल छात्र सड़क पर उतरे
आपात सेवाओं को छोड़कर OPD और वार्ड सेवाएं बंद
शिमला। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल आईजीएमसी में शनिवार को हालात उस समय और तनावपूर्ण हो गए, जब सैकड़ों रेजिडेंट डॉक्टर, इंटर्न और मेडिकल छात्र अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे रहे। अटल सभागार भवन के बैडमिंटन कोर्ट में दोपहर करीब बारह बजे एकत्र हुए चिकित्सकों ने बर्खास्त डॉक्टर की बहाली की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी की। आरडीए (रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन) की अगुवाई में हुए इस प्रदर्शन में “वी वांट जस्टिस”, “सम्मान दो, सेवाएं लो” जैसे नारों के साथ एकजुटता का संदेश दिया गया।
प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने साफ कहा कि जब तक बर्खास्तगी के आदेश वापस नहीं लिए जाते, तब तक आईजीएमसी में यह आंदोलन जारी रहेगा। चिकित्सकों ने बताया कि हड़ताल के दौरान अस्पतालों में केवल आपातकालीन सेवाएं ही चालू रहेंगी, जबकि ओपीडी और वार्ड सेवाएं पूरी तरह बंद रहेंगी। इससे मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
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आरडीए के अध्यक्ष डॉ. सोहेल शर्मा ने रेजिडेंट और इंटर्न को संबोधित करते हुए कहा कि आईजीएमसी में हुई हालिया घटना दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन इसके बाद जिस तरह से केवल चिकित्सक के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की गई, उससे पूरे चिकित्सक समुदाय और संस्थान की साख को ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा कि मात्र छह घंटे में निलंबन और 48 घंटे के भीतर बर्खास्तगी का फैसला यह दर्शाता है कि मामले की निष्पक्ष जांच किए बिना एकतरफा निर्णय लिया गया।
डॉ. सोहेल शर्मा ने कहा कि किसी भी हिंसा की घटना के दो पहलू होते हैं, लेकिन आईजीएमसी प्रकरण में बिना पूरी जांच के चिकित्सक को दोषी ठहरा दिया गया। इससे भविष्य में अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे फैसलों से डॉक्टरों के लिए मरीजों का इलाज करना मुश्किल हो जाएगा और वे आए दिन धमकियों का सामना करेंगे।
आरडीए अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि डॉ. नरूला की बर्खास्तगी न्यायसंगत नहीं है। सरकार को चाहिए कि वह इस फैसले पर पुनर्विचार करे, बर्खास्तगी के आदेश वापस ले और आईजीएमसी सहित सभी सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के बाद ही कोई ठोस निर्णय लिया जाना चाहिए था।
चिकित्सकों ने यह भी बताया कि इस हड़ताल को मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन के साथ-साथ प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों की आरडीए का पूरा समर्थन मिल रहा है। जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आईजीएमसी में रेजिडेंट डॉक्टर केवल आपातकालीन सेवाएं ही देते रहेंगे और आंदोलन जारी रहेगा।
