Shimla IGMC Assault Case: डॉक्टर सामूहिक अवकाश पर, OPD सेवाएं प्रभावित
बर्खास्तगी आदेश रद्द करने की मांग
शिमला। Shimla IGMC Assault Case को लेकर हिमाचल प्रदेश में चिकित्सा जगत में तनाव की स्थिति बनी हुई है। आईजीएमसी शिमला में मरीज से कथित मारपीट के मामले में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर की बर्खास्तगी के बाद डॉक्टर संगठनों में भारी रोष है। इसके विरोध में चिकित्सक संगठनों ने शुक्रवार को एक दिवसीय सामूहिक अवकाश पर जाने का फैसला किया, जिससे अस्पताल की OPD सेवाएं प्रभावित रहीं।
डॉक्टर संगठनों ने चेतावनी दी थी कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो शुक्रवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी। इसी कड़ी में शुक्रवार को रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA) के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मुलाकात की और Shimla IGMC Assault Case से जुड़ी अपनी मांगें उनके समक्ष रखीं।
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मुख्यमंत्री से सकारात्मक वार्ता के बाद रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने हड़ताल का निर्णय वापस ले लिया। आईजीएमसी शिमला के RDA अध्यक्ष सोहिल शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों की शिकायतों को गंभीरता से सुना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि Shimla IGMC Assault Case में आरोपी डॉ. राघव नरूला के मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाएगी।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने अस्पताल परिसर में घुसकर डॉक्टरों को धमकाने वाली भीड़ के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर संशोधित गाइडलाइंस जारी करने की भी घोषणा की गई है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
गौरतलब है कि 22 दिसंबर को आईजीएमसी शिमला में डॉक्टर और मरीज के बीच हुई मारपीट के मामले में राज्य सरकार ने सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर राघव नरूला की सेवा समाप्ति के आदेश जारी किए थे। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के सख्त रुख के बाद की गई, लेकिन Shimla IGMC Assault Case में की गई इस कार्रवाई को लेकर डॉक्टर संगठनों ने इसे अन्यायपूर्ण बताया है।
डॉक्टर संगठनों का कहना है कि बिना पूरी जांच के सेवा समाप्ति का आदेश गलत है और इसे तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाना चाहिए। फिलहाल मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद स्थिति कुछ हद तक सामान्य हुई है, लेकिन Shimla IGMC Assault Case पर सभी की निगाहें अब जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।
प्रदेश के अन्य जिलों में भी शुक्रवार को चिकित्सकों की हड़ताल का व्यापक असर पड़ा। विभिन्न अस्पतालों की ओपीडी में कोई चिकित्सक न होने के कारण रोगियों को काफ़ी परेशानी उठानी पड़ी।
