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नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी की जमानत याचिका खारिज
शिमला फास्ट ट्रैक कोर्ट का सख्त रुख
शिमला। राजधानी शिमला की फास्ट ट्रैक विशेष अदालत (रेप/पॉक्सो) ने नाबालिग से दुष्कर्म के गंभीर मामले में आरोपी अभय कुमार उर्फ निशु की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने अपराध की गंभीरता, पीड़िता के बयान और गवाहों पर प्रभाव की आशंका को देखते हुए आरोपी को राहत देने से इनकार किया।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विवेक शर्मा की अदालत ने अपने आदेश में कहा कि नाबालिग से दुष्कर्म जैसे मामलों में कानून का उद्देश्य पीड़ित बच्चे के सर्वोत्तम हितों की रक्षा करना है। पोक्सो एक्ट के तहत ऐसे मामलों में सख्ती बरतना आवश्यक है।
स्कूल जाती नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले गया आरोपी
मामले के अनुसार, 19 मई 2025 को आरोपी अभय कुमार ने 15 वर्षीय नाबालिग स्कूली छात्रा को स्कूल जाते समय बहला-फुसलाकर घुमाने के बहाने अपने रिश्तेदार के घर ले गया, जहां उसके साथ नाबालिग से दुष्कर्म किया गया। घटना के बाद आरोपी ने पीड़िता को धमकाया, जिसके कारण वह शुरू में चुप रही।
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पीड़िता के अनुसार, 12 जून 2025 को जब मासिक धर्म नहीं आया तो उसने अपनी मां को आपबीती बताई। इसके बाद पुलिस थाना बालूगंज शिमला में नाबालिग से दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया।
इन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2), 64 और पोक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत केस दर्ज किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, मामला पूरी तरह से पोक्सो एक्ट के दायरे में आता है, जो नाबालिग से दुष्कर्म को गंभीर अपराध मानता है।
गवाहों को प्रभावित करने की आशंका
अदालत ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ट्रायल अभी प्रारंभिक चरण में है और कई अहम गवाहों के बयान बाकी हैं। यदि इस स्तर पर आरोपी को जमानत दी जाती है तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है या फरार हो सकता है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि नाबालिग से दुष्कर्म के मामलों में समाजिक प्रभाव और पीड़ित की सुरक्षा को प्राथमिकता देना आवश्यक है। इसलिए जमानत याचिका को खारिज किया जाता है।
जमानत आदेश का ट्रायल पर असर नहीं
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत अर्जी पर की गई टिप्पणियां केवल इसी याचिका के निपटारे तक सीमित हैं और इनका मुख्य मामले के गुण-दोष पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
