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त्रिलोकपुर को रेणुका जी की तर्ज पर धार्मिक पर्यटन नगरी बनाने का प्रयास
शिवमंदिर ताल में जल्द शुरू होगा नौकायन
नाहन (सिरमौर)। जिला सिरमौर का प्रसिद्ध शक्ति पीठ त्रिलोकपुर अब धार्मिक पर्यटन नगरी के रूप में विकसित होने जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधाएं बढ़ाने, स्थानीय पर्यटन को गति देने और धार्मिक महत्व को समृद्ध करने के लिए कई योजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है। इसी क्रम में शिव मंदिर तालाब में नौकायन सुविधा शुरू करने की पहल अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। पहले चरण में सात नौकाएं पहुंच चुकी हैं और जल्द ट्रायल भी शुरू होगा।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
मंदिर न्यास और प्रशासन ने त्रिलोकपुर को दीर्घकालिक धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य तय किया है। जानकारी के अनुसार श्री रेणुकाजी की तर्ज पर ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं, जिनसे श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना के साथ-साथ प्राकृतिक वातावरण का भी आनंद मिल सके। इससे धार्मिक पर्यटन की नई संभावनाएं खुलेंगी और स्थानीय संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा।
नौकायन से बढ़ेगा पर्यटन व राजस्व
मंदिर न्यास उपाध्यक्ष एवं एसडीएम नाहन राजीव संख्यान ने बताया कि त्रिलोकपुर में नौकायन शुरू होना पर्यटन विकास का नया अध्याय होगा। इससे न केवल श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी बल्कि मंदिर न्यास के राजस्व में भी वृद्धि होगी। विशेष अवसरों पर यहां भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, इसलिए लंबे समय से सुविधाओं के विस्तार की जरूरत महसूस की जा रही थी।
स्थानीय व्यापार और रोजगार को लाभ
स्थानीय लोगों—पवन भारद्वाज, लाल सिंह, दिनेश, अभय और राजपाल ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि नौकायन शुरू होने के बाद त्रिलोकपुर में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी। इससे होटल, दुकान, परिवहन क्षेत्र सहित स्थानीय व्यापार को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनेंगे, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
सांस्कृतिक पहचान को नई दिशा
यहां मौजूद सिरमौरी सभ्यता और संस्कृति को दर्शाने वाला संग्रहालय पहले से ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। त्रिलोकपुर शक्ति पीठ सिरमौर का प्राचीन व अत्यंत लोकप्रिय धार्मिक स्थल है, जहां नवरात्रों सहित वर्षभर भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
भविष्य में बनेगा प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र
नौकायन सुविधा शुरू होने से त्रिलोकपुर में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलता दिखाई दे रहा है। इससे न केवल श्रद्धालु बल्कि सामान्य पर्यटक भी आकर्षित होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यटन विकास के साथ-साथ क्षेत्रीय संस्कृति और धार्मिक पहचान को भी नई दिशा मिल सकती है।
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