कालाअंब में बेसहारा पशु समस्या बढ़ी
राहगीरों की सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा
कालाअंब (सिरमौर)। औद्योगिक क्षेत्र में बेसहारा पशु समस्या तेजी से गंभीर रूप ले रही है। सड़क किनारे छोड़े गए मवेशी आए दिन दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं, जिससे आवागमन जोखिम भरा होता जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार ये पशु अचानक सड़क पर आ जाते हैं, खासकर दोपहिया वाहन चालक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कई बार खदेड़ने पर ये मवेशी हमला तक कर देते हैं, जिसके चलते चोटिल होने की घटनाएं बढ़ रही हैं।
हाल ही की घटना में मैनथापल क्षेत्र में एक सांड ने राहगीर को घायल कर दिया। क्षेत्रवासियों—विमल, अमित, रूप लाल, अशोक कुमार, लक्ष्मण, मोहित और सुशील—का कहना है कि बेसहारा पशु समस्या से निपटने के लिए न तो कोई ठोस सरकारी योजना धरातल पर दिख रही है और न ही इन पशुओं को सड़कों पर छोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बेसहारा पशु को चिह्नित कर गौशालाओं में भेजने की व्यवस्था मजबूत की जाए और नियमित मॉनिटरिंग हो, ताकि सड़क पर बढ़ती लावारिस पशु समस्या को नियंत्रित किया जा सके।
इस संबंध में नाहन के विधायक अजय सोलंकी ने जानकारी दी कि हाल ही में नाहन विधानसभा क्षेत्र से 70–80 पशुओं को विभिन्न गौशालाओं में भेजा गया है। उन्होंने बताया कि जिले की गौशालाओं में फिलहाल स्थान की कमी है, इसलिए आवश्यकता पड़ने पर पड़ोसी राज्यों की गौशालाओं से भी बातचीत कर व्यवस्था की जाएगी। साथ ही जनता और पशुपालकों से अपील की गई है कि वे किसी भी पशु को सड़कों पर न छोड़ें और उन्हें सुरक्षित आश्रय तक पहुँचाने में सहयोग करें।
गौरतलब है कि प्रदेश में कुल 260 गोसदन कार्यरत हैं, जिनमें 15 सरकारी और 245 निजी क्षेत्र में हैं। वर्तमान में 21,360 गोवंश आश्रय में रखे गए हैं, जबकि 6 नए गोसदनों का निर्माण जारी है। पंजीकृत पशुओं को छोड़ने वाले पशुपालकों पर प्रथम बार 500 रुपये तथा दोबारा ऐसा करने पर 700 रुपये जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
