Home संपादकीय औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब : (Exclusive Story-01) विकास के दावों के बीच Shocking Reality का आईना – संपादकीय

औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब : (Exclusive Story-01) विकास के दावों के बीच Shocking Reality का आईना – संपादकीय

by Dainik Janvarta
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औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब के विकास के दावों की पोल खोलती तस्वीर

औद्योगिक क्षेत्र में विकास के नाम पर छलावा, उम्मीदों पर पहरा

Exclusive Story (Editorial) by Sanjay Gupta

कालाअंब (सिरमौर)। औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब सिरमौर जिले में स्थित वह क्षेत्र है जो हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को प्रतिदिन लाखों रुपये का राजस्व देता है। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि जिस क्षेत्र से प्रदेश की आर्थिक धारा बहती है, वही आज विकास के प्यासे स्वरूप में खड़ा है। दशकों से सरकारें आती-जाती रहीं, पर औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब की हालत में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ। हर चुनावी मौसम में विकास के गीत गाए जाते हैं, लेकिन धरातल पर हकीकत किसी उजड़े औद्योगिक कस्बे से कम नहीं लगती।

टूटी सड़कें उजागर कर रही विकास का सच

विकास की पहली कसौटी होती है बुनियादी ढांचा और यही सबसे अधिक जर्जर है। कालाअंब-त्रिलोकपुर मार्ग की हालत इतनी खस्ता है कि वाहन चालक हर मोड़ पर खतरा महसूस करते हैं। गड्ढों से भरी यह सड़क मानो सरकार के विकास दावों पर सीधा तमाचा मारती हो। वहीं राष्ट्रीय उच्च मार्ग 07 की स्थिति और भी भयावह है। सड़क पर बने गड्ढों को मिट्टी डालकर भरा जा रहा है, जिससे धूल का गुबार पूरे क्षेत्र में फैलता है। धूल से जूझते दुकानदार और राहगीर अब विकास शब्द से ही खौफ खाने लगे हैं।

सकेती रोड और औद्योगिक इकाइयों की दुर्दशा

कालाअंब–सकेती–खजूरना सड़क की स्थिति भी किसी से छिपी नहीं है। यह मार्ग लगभग एक दर्जन औद्योगिक इकाइयों से जुड़ा हुआ है, पर बरसात के मौसम में यह सड़क कीचड़ का दलदल बन जाती है। स्थानीय उद्योगों को माल ढुलाई में भारी नुकसान उठाना पड़ता है। औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब के उद्योगपति अक्सर शिकायत करते हैं कि जब सड़कें ही इस हाल में हैं, तो उद्योगों की प्रगति की कल्पना कैसे की जा सकती है?

पेयजल योजनाएं हिचकोले खा रही हैं

सड़कें ही नहीं, बल्कि पेयजल योजनाएं भी औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब की सबसे बड़ी समस्या बन चुकी हैं। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई पेयजल योजनाएं गर्मियों में दम तोड़ देती हैं। एक छोटी तकनीकी खराबी आने पर दो-दो हफ्ते तक पानी की सप्लाई ठप रहती है। नतीजतन ग्रामीणों को 400 रुपये प्रति टैंकर पानी खरीदना पड़ता है। विडंबना यह है कि औद्योगिक क्षेत्र होने के बावजूद यहां स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था तक पुख्ता नहीं है।

बस स्टैंड या उपेक्षा का प्रतीक?

प्रदेश के प्रवेश द्वार पर स्थित बस ठहराव भी क्षेत्र की दुर्दशा का प्रतीक बन चुका है। न बैठने की जगह है, न पीने के पानी की सुविधा और न ही यात्रियों के लिए शौचालय। हर दिन सैकड़ों लोग यहां बस की प्रतीक्षा में खड़े रहते हैं, लेकिन उन्हें केवल धूल और असुविधा का सामना करना पड़ता है। औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की यह कमी विकास के खोखले नारों को उजागर करती है।

सफाई व्यवस्था रामभरोसे, गंदगी के ढेरों का साम्राज्य

औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब का एक और ज्वलंत मुद्दा है सफाई व्यवस्था। ढाबों, होटलों और आवासीय क्षेत्रों से निकलने वाला कचरा खुले में फेंका जा रहा है। न कोई ठोस निस्तारण प्रणाली है, न नियमित सफाई। औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में प्रवेश करते ही गंदगी के ढेर और बदबूदार नालियां आगंतुकों का स्वागत करती हैं। यह स्थिति न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि औद्योगिक छवि को भी धूमिल कर रही है।

चुनावी मौसम में ही क्यों याद आता है कालाअंब?

हर चुनाव के समय औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब राजनीतिक दलों के एजेंडे में सबसे ऊपर होता है। नेता मंचों से विकास की गारंटी देते हैं, रोडमैप दिखाते हैं, योजनाओं के पिटारे खोलते हैं, लेकिन चुनाव परिणाम आते ही सब वादे हवा हो जाते हैं। विकास के वादों की उम्र सिर्फ चुनावी भाषणों तक सिमट जाती है। उसके बाद यही क्षेत्र फिर से उपेक्षा की अंधेरी गलियों में चला जाता है।

अब जागे सरकारें, तभी बदलेगा भविष्य

समय आ गया है कि सरकारें और प्रशासन औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब की दशा को गंभीरता से लें। यहां का औद्योगिक उत्पादन प्रदेश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि सड़कें सुधरें, पेयजल व्यवस्था दुरुस्त हो, सफाई तंत्र सशक्त बने तो यह क्षेत्र न केवल सिरमौर बल्कि पूरे प्रदेश के विकास में नई ऊर्जा भर सकता है।

औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब को अब भाषण नहीं, बल्कि ठोस कार्य चाहिए ताकि यह क्षेत्र वास्तव में हिमाचल का औद्योगिक गौरव बन सके, न कि सिर्फ चुनावी घोषणापत्र का हिस्सा।

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